✎ डीसीसी बैंक आरटीआई अधिनियम के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
**कर्नाटक सूचना आयोग ने आरटीआई अधिनियम के तहत कलाबुरागी-यादगिर डीसीसी बैंक को ‘लोक प्राधिकरण’ घोषित किया**
कर्नाटक सूचना आयोग की कलाबुरागी पीठ ने 30 जुलाई, 2026 को एक महत्वपूर्ण फैसले में कलाबुरागी-यादगिर जिला केंद्रीय सहकारी (डीसीसी) बैंक को आरटीआई अधिनियम, 2005 की धारा 2(एच) के तहत ‘लोक प्राधिकरण’ घोषित कर दिया। आयोग ने माना कि बैंक को राज्य से प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता न मिलने के बावजूद सरकार के नियंत्रण में कार्य करता है। आयोग ने कहा कि सरकार द्वारा बैंक में शेयर पूंजी लगाने, सीईओ एवं प्रबंध निदेशक की नियुक्ति करने तथा सहकारी विभाग द्वारा अनियमितताओं की जांच पर प्रबंधन को निलंबित करने के अधिकार के कारण यह ‘लोक प्राधिकरण’ की श्रेणी में आता है। इसके अलावा, सरकार द्वारा किसानों को दिए गए ऋणों पर ब्याज में सहायता तथा ऋण माफी राशि की प्रतिपूर्ति भी इस बात की पुष्टि करती है कि बैंक सरकारी नियंत्रण में है। बैंक के कर्मचारियों की भर्ती में सरकारी अनुमोदन आवश्यक है तथा एनएबीएआरडी एवं शीर्ष बैंक द्वारा वार्षिक निरीक्षण किए जाते हैं, जो सरकार के अप्रत्यक्ष नियंत्रण को दर्शाते हैं।
इस फैसले का बैंकिंग, एसएससी एवं आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए विशेष महत्व है। बैंकिंग क्षेत्र में सहकारी बैंकों की भूमिका तथा उनके नियामक ढांचे को समझने के लिए यह मामला महत्वपूर्ण है, क्योंकि आरटीआई अधिनियम के तहत पारदर्शिता बढ़ाने से बैंकिंग प्रणाली में जवाबदेही सुनिश्चित होगी। एसएससी परीक्षाओं में आरटीआई अधिनियम के प्रावधानों तथा लोक प्राधिकरणों की परिभाषा से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं, जबकि आरबीआई ग्रेड बी में सहकारी बैंकों के विनियमन तथा सरकारी नियंत्रण के पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। इस फैसले से यह स्पष्ट होता है कि सहकारी बैंक भी आरटीआई के दायरे में आ सकते हैं, जिससे उनके कार्यप्रणाली में पारदर्शिता बढ़
स्रोत: The Hindu
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