✎ केरल में एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है जिसे तत्काल रणनीतिक हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
**एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध केरल में मजबूत होता जा रहा है, नवीनतम रिपोर्ट में हुआ खुलासा**
केरल एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस सर्विलांस नेटवर्क (केएआरएस-नेट) द्वारा 2025 के लिए जारी आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य में एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध (एएमआर) अब आईसीयू तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामान्य अस्पतालों और सामुदायिक संक्रमणों में भी फैल चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में ई. कोलाई, क्लेबसिएला और स्टेफिलोकोकस ऑरियस जैसे जीवाणु सामान्य एंटीबायोटिक्स के प्रति प्रतिरोधी हो गए हैं, जिसमें कार्बापेनेम जैसे अंतिम उपाय वाले एंटीबायोटिक्स भी प्रभावी नहीं रह गए हैं। विशेष रूप से, रक्त संक्रमणों में ई. कोलाई के 73% मामलों में एक्सटेंडेड-स्पेक्ट्रम बीटा-लैक्टमेज (ईएसबीएल) उत्पादन देखा गया, जबकि क्लेबसिएला के 43% मामलों में कार्बापेनेम प्रतिरोध पाया गया। इससे पता चलता है कि गंभीर संक्रमणों का इलाज अब अत्यंत चुनौतीपूर्ण हो रहा है।
इस मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए, केरल ने सात वर्षों में एंटीमाइक्रोबियल प्रतिरोध पर निगरानी और नियंत्रण के लिए एक मॉडल तैयार किया है, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीडीसी) द्वारा मान्यता दी गई है। हालांकि, व्यापक निगरानी के बावजूद, एंटीबायोटिक दुरुपयोग और अनुचित उपयोग में कमी नहीं आई है, जिससे प्रतिरोध दरें उच्च बनी हुई हैं। बैंकिंग और एसएससी परीक्षाओं के लिए यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य, शासन और अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ है, जबकि आरबीआई ग्रेड बी परीक्षा में भी स्वास्थ्य क्षेत्र की नीतियों और उनके आर्थिक प्रभावों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
स्रोत: The Hindu
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