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जनजातीय भूमि अधिकार और परियोजनाओं में सहमति — concept mind map

✎ जनजातीय भूमि अधिकार एवं परियोजना सहमति हेतु संविधान, कानून एवं प्रक्रिया का समुचित ज्ञान आवश्यक है।

वन भूमि विपथन प्रक्रियावन भूमिगैर-वानिकी हेतु प्रस्तावपीएआरआईवीईएसएच पोर्टलऑनलाइन प्रस्ताव प्रसंस्करणग्राम सभासिफारिश आवश्यकसरकारी विकास सुविधा1 हेक्टेयर तक विपथनवन अधिकारों अधिनियम 2006धारा 3(2) प्रावधान
वन भूमि विपथन प्रक्रिया

प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance

जनजातीय भूमि अधिकार और परियोजनाओं में सहमति का मुद्दा देश के संविधान और कानूनी ढांचे में गहराई से निहित है। भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची की राज्य सूची (प्रविष्टि 18) के तहत भूमि और उसके प्रबंधन का अधिकार राज्य सरकारों के पास है, जबकि केंद्र सरकार भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास जैसे मामलों में विभिन्न कानूनों के माध्यम से भूमिका निभाती है। अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 (एफआरए) के तहत वन भूमि के विपथन के लिए ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य है, विशेषकर जब वन भूमि का उपयोग गैर-वानिकी कार्यों के लिए किया जाना हो। वन (संरक्षण एवं संवर्धन) नियम, 2023 के नियम 11(7) में यह प्रावधान किया गया है कि वन भूमि के विपथन, पट्टे पर देने या अनारक्षण के आदेश तभी जारी किए जा सकते हैं, जब केंद्र सरकार से अंतिम मंजूरी प्राप्त हो और सभी संबंधित कानूनों का पालन सुनिश्चित किया जाए। हालांकि, जनजातीय भूमि के विपथन से संबंधित विवादों का ब्यौरा केंद्र सरकार द्वारा नहीं रखा जाता, क्योंकि इन मामलों का निपटारा राज्य सरकारों द्वारा किया जाता है।

इस विषय का महत्व बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए अत्यधिक प्रासंगिक है, क्योंकि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और जनजातीय अधिकारों से जुड़े कानूनी मुद्दे अक्सर विकास परियोजनाओं, वित्तीय संस्थानों और सरकारी नीतियों के केंद्र में रहते हैं। उदाहरण के लिए, भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 2013 और एफआरए जैसे कानूनों का अध्ययन बैंकिंग परीक्षाओं में भूमि संसाधनों के प्रबंधन और वित्तीय जोखिमों के आकलन के संदर्भ में किया जाता है। इसी प्रकार, आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं में जनजातीय क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं के वित्तपोषण और उनके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं। एसएससी परीक्षाओं में भी संविधान के विभिन्न प्रावधानों, अनुसूचित जनजातियों के

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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