✎ पीएम विश्वकर्मा योजना पारंपरिक कारीगरों को संस्थागत सहायता, कौशल उन्नयन और वित्तीय मदद देकर उनकी आय और उत्पादकता बढ़ाती है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
**पीएम विश्वकर्मा योजना के तीन वर्ष पूरे होने पर 30 लाख कारीगरों का पंजीयन एक बड़ी उपलब्धि है।** भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा शुरू की गई इस योजना ने पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को संस्थागत सहायता, कौशल प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरण, ऋण सुविधा और बाजार से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। योजना के तहत 18 चिन्हित व्यवसायों से जुड़े कारीगरों को पहचान पत्र, प्रमाणपत्र, टूलकिट और 1 लाख रुपये तक के ऋण (5% ब्याज दर पर) उपलब्ध कराए गए हैं। इससे न केवल उनकी उत्पादकता बढ़ी है, बल्कि उनकी आय में भी सुधार हुआ है। तीन वर्षों में 30 लाख कारीगरों का पंजीयन और 24.50 लाख को कौशल प्रशिक्षण देना इस योजना की सफलता का प्रमाण है। यह पहल ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण को साकार करने में सहायक रही है, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिला है।
**बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए यह योजना अत्यंत प्रासंगिक है।** बैंकिंग परीक्षाओं में सरकारी योजनाओं, वित्तीय समावेशन और कौशल विकास से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। इस योजना के माध्यम से कारीगरों को ऋण सुविधा, कौशल प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने के प्रयासों से बैंकिंग प्रणाली में वित्तीय समावेशन और उद्यमिता को बढ़ावा मिल रहा है। एसएससी परीक्षाओं में भी सरकारी पहलों, रोजगार सृजन और सामाजिक कल्याण योजनाओं से जुड़े प्रश्न शामिल होते हैं, जिनमें पीएम विश्वकर्मा योजना एक प्रमुख उदाहरण हो सकती है। आरबीआई ग्रेड बी में भी नीति निर्माण, वित्तीय समावेशन और आर्थिक विकास से संबंधित विषयों पर ध्यान दिया जाता है, जहाँ इस योजना का उल्लेख नीति-निर्माण के दृष्टिकोण से किया जा सकता है। इस प्रकार, यह योजना परीक्षा के दृष्टिकोण से बहुआयामी महत्व रखती है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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