
✎ नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु विवाद और उनकी राख लाने के प्रयास पर सरकार को मुक्ति बोस फाइलें सार्वजनिक कर सत्य स्थापना करनी चाहिए।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
**नोट:**
अखिल भारतीय फॉरवर्ड ब्लॉक (एआईएफबी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार से न्यायमूर्ति मुखर्जी आयोग की रिपोर्ट को औपचारिक रूप से स्वीकार करने तथा नेताजी सुभाष चंद्र बोस की रेंकोजी मंदिर (जापान) में रखी गई “कथित अस्थियों” को भारत लाने के प्रयासों को रोकने की मांग की है। मुखर्जी आयोग ने 1999 में नेताजी के लापता होने तथा 18 अगस्त, 1945 को विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु के दावे की जांच के लिए गठित किया गया था। आयोग ने 2005 में अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि नेताजी उस विमान दुर्घटना में नहीं मरे तथा रेंकोजी मंदिर की अस्थियाँ उनके नहीं हैं। फॉरवर्ड ब्लॉक के महासचिव जी. देवराजन ने कहा कि बार-बार अस्थियों को लाने के प्रयास सच्चाई की बजाय प्रचार का विषय बन रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि वह नेताजी से संबंधित सभी गुप्त फाइलों को सार्वजनिक करे तथा विशेष जांच दल एवं नए आयोग के माध्यम से ताजा जांच कराए। यह मामला वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है, जहाँ नेताजी की पुत्री अनिता पी. फाफ ने उनकी अस्थियों को वापस लाने की याचिका दायर की है।
**परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्व:**
बैंक पीओ, आईबीपीएस, एसबीआई, आरबीआई ग्रेड बी तथा एसएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय महत्व के विषयों पर प्रश्न पूछे जाते हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस से संबंधित यह मामला देश की स्वतंत्रता संग्राम एवं ऐतिहासिक घटनाओं से जुड़ा है, जिसकी प्रासंगिकता शासन व्यवस्था, न्यायपालिका तथा सरकार की जवाबदेही जैसे विषयों से है। मुखर्जी आयोग की रिपोर्ट, सुप्रीम कोर्ट की भूमिका तथा सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दे प्रशासनिक सुधार, पारदर्शिता तथा ऐतिहासिक सत्य की खोज जैसे विषयों से संबंधित हैं, जो सामान्य जागरूकता तथा मॉक टेस्ट के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसके अतिरिक्त, सरकारी नीतियों,
स्रोत: The Hindu
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