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भोपाल में ई-कचरा बना जहरीला खतरा: एनजीटी ने मांगी जांच रिपोर्ट, खुले में जलाए जा रहे मोबाइल-कंप्यूटर से सीसा — diagram
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E-waste burning toxic threat

✎ भोपाल में ई-कचरे के अवैज्ञानिक निस्तारण से उत्पन्न सीसा प्रदूषण पर एनजीटी द्वारा जांच और कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

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भोपाल में ई-कचरे के अवैज्ञानिक निस्तारण और खुले में जलाने के आरोपों पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है। अधिकरण ने पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव की जांच के लिए एक समिति गठित की है, जिसे चार सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को होगी। आवेदन में दावा किया गया है कि भोपाल में मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के कचरे को खुले में जलाया जा रहा है, जिससे सीसा, पारा, कैडमियम और क्रोमियम जैसी जहरीली धातुएं निकल रही हैं। इससे हवा, पानी और मिट्टी के प्रदूषित होने का खतरा बढ़ गया है, जिसका सीधा असर मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। मध्य प्रदेश में ई-कचरे का उत्पादन 2019 के मुकाबले दस गुना बढ़कर अब लगभग 5,000 मीट्रिक टन वार्षिक हो गया है, जिससे भोपाल के अलावा इंदौर, ग्वालियर और उज्जैन जैसे शहर भी प्रभावित हो रहे हैं।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एनजीटी ने भोपाल कलेक्टर, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल, नगर निगम, पर्यावरण विभाग और स्वास्थ्य विभाग सहित कई विभागों के प्रमुखों को पक्षकार बनाया है। समिति में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जो ई-कचरे के निस्तारण और प्रसंस्करण के तरीकों की जांच करेंगे। यह मुद्दा न केवल पर्यावरणीय संकट को उजागर करता है, बल्कि सरकारी नीतियों और उनके कार्यान्वयन में खामियों को भी रेखांकित करता है। बैंकिंग और बीमा क्षेत्र में कार्यरत उम्मीदवारों के लिए यह विषय ‘सतत विकास लक्ष्यों’ (एसडीजी) और ‘पर्यावरण, सामाजिक एवं शासन’ (ईएसजी) मानकों के तहत महत्वपूर्ण है, जबकि एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं में इसे ‘सामाजिक-आर्थ

स्रोत: amarujala.com


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