✎ भोपाल में ई-कचरे के अवैज्ञानिक निस्तारण से सीसा जैसे जहरीले तत्व निकल रहे हैं, जिससे पर्यावरण एवं जनस्वास्थ्य को खतरा है तथा एनजीटी ने इसकी जांच के आदेश दिए हैं।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
भोपाल में ई-कचरे के अवैज्ञानिक निस्तारण और खुले में जलाने के कारण उत्पन्न जहरीले खतरों पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए चार सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट मांगी है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, शहर में मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के कचरे को अनधिकृत इकाइयों में असुरक्षित तरीके से तोड़ा जा रहा है या खुले में जलाया जा रहा है, जिससे सीसा, पारा, कैडमियम और क्रोमियम जैसी जहरीली धातुएं पर्यावरण में मिल रही हैं। इससे हवा, पानी और मिट्टी प्रदूषित हो रही है, जिसका सीधा असर मानव स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। एनजीटी ने मामले की सुनवाई में शामिल न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ ने संबंधित विभागों—भोपाल कलेक्टर, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण मंडल, नगर निगम, पर्यावरण विभाग, विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग—को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। समिति में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, स्वास्थ्य विभाग और राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जो ई-कचरे के प्रसंस्करण और उसके प्रभावों की व्यापक जांच करेंगे।
यह मामला बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि इसमें पर्यावरणीय विनियमन, सार्वजनिक स्वास्थ्य और शासन से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। बैंक पीओ और आईबीपीएस परीक्षाओं में पर्यावरणीय नीतियों, ई-कचरे के प्रबंधन और सरकारी पहलों से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं, जबकि एसएससी में जन स्वास्थ्य और प्रदूषण नियंत्रण जैसे विषयों पर भी ध्यान दिया जाता है। आरबीआई ग्रेड बी के लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें आर्थिक विकास और पर्यावरणीय स्थिरता के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौतियों पर चर्चा होती है। इसके अलावा, यह मामला नीति निर्माण, सरकारी जवाबद
स्रोत: amarujala.com
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