✎ महिला आरक्षण विधेयक से राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा।
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लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने हाल ही में फरीदाबाद में राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा आयोजित “लिंग-उत्तरदायी शासन” विषयक दो दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए कहा कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण एक ऐतिहासिक आवश्यकता है, जो उनके राजनीतिक नेतृत्व के लिए नए रास्ते खोलेगा। उन्होंने बताया कि विभिन्न सार्वजनिक सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी के कारण जल्द ही 50 प्रतिशत से अधिक नेतृत्व महिलाओं के हाथों में होगा। श्री बिरला ने जोर दिया कि अब महिलाओं को केवल सहायता प्रदान करने तक सीमित रखने के बजाय उन्हें नीतियों, कानूनों और कार्यक्रमों को आकार देने में सक्रिय भूमिका निभाने में सक्षम बनाना होगा। उन्होंने कहा कि महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण के बिना भारत एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे नहीं बढ़ सकता। इस अवसर पर उन्होंने महिला विधायकों से अपने क्षेत्रों में सफल पहलों को साझा करने और सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने का आग्रह किया।
इस कार्यशाला में 20 राज्यों एवं 2 केंद्र शासित प्रदेशों की लगभग 200 महिला विधायक शामिल थीं, जिन्होंने अपने अनुभवों और विचारों का आदान-प्रदान किया। लोकसभा अध्यक्ष ने बताया कि महिलाएं हमेशा से राष्ट्र निर्माण में अग्रणी रही हैं, और इस तरह के मंच उन्हें अपनी नेतृत्व क्षमता को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने संवेदनशीलता को महिला नेतृत्व की प्रमुख शक्ति बताया, जो लोगों की चिंताओं को गहराई से समझने और प्रभावी समाधान खोजने में सहायक होती है। इस प्रकार, महिला आरक्षण विधेयक न केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व बढ़ाएगा, बल्कि सामाजिक न्याय और विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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