✎ डिजिटल अरेस्ट स्कैम रोकने के लिए RBI, राज्यों और केंद्र सरकार को मिलकर काम करना होगा।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में डिजिटल अरेस्ट जैसे बढ़ते साइबर फ्रॉड मामलों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार और आरबीआई को निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने आरबीआई को चार सप्ताह के भीतर ‘म्यूल अकाउंट्स’ पर एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने का आदेश दिया है, ताकि ऐसे खातों का दुरुपयोग रोकने में मदद मिल सके। इसके साथ ही, सभी राज्यों को साइबर फ्रॉड रोकने के लिए तंत्र को तेजी से लागू करने और पीड़ितों को त्वरित राहत पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने ई-जीरो एफआईआर प्रणाली और राज्य साइबर अपराध समन्वय केंद्रों की स्थापना पर भी जोर दिया है, जिससे मामलों का त्वरित निस्तारण हो सके। यह निर्णय बैंकिंग क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि म्यूल अकाउंट्स का उपयोग धन शोधन और ठगी में व्यापक रूप से किया जाता रहा है। आरबीआई द्वारा तैयार की जाने वाली एसओपी से बैंकों को ऐसे खातों की पहचान और रोकथाम में मदद मिलेगी, जिससे वित्तीय प्रणाली की सुरक्षा बढ़ेगी। साथ ही, साइबर फ्रॉड के मामलों में तेजी से कार्रवाई से बैंकिंग धोखाधड़ी में कमी आएगी, जो बैंक पीओ, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण विषय है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने टेलीकॉम सेवाओं पर समय-आधारित प्रतिबंध लगाने और इंटर-डिपार्टमेंटल समिति गठित करने का भी निर्देश दिया है, ताकि तकनीकी उपायों के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट जैसे घोटालों पर अंकुश लगाया जा सके। कोर्ट ने अगली सुनवाई 16 सितंबर को रखी है, जिसमें राज्यवार और बैंकवार मामलों की स्थिति पर रिपोर्ट पेश की जाएगी। यह निर्णय न केवल साइबर सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ाएगा। ऐसे मामलों में आरबीआई की भूमिका और सरकार की साइबर अपराध रोकथाम रणनीति परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रमुख बिंदु हैं, जिनसे उम्मीदवारों को अवग
स्रोत: bhaskar.com
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