✎ स्वतंत्र चुनाव आयोग के लिए सीजेआई सहित चयन समिति आवश्यक है, जिसे 2023 कानून में हटा दिया गया था।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों (ईसी) की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून पर सुनवाई के दौरान जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ एकमत नहीं रही। जस्टिस दत्ता ने मामले को पांच जजों की संविधान पीठ को भेजने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जबकि जस्टिस शर्मा ने इसे मंजूरी दी। दोनों ने मामले को मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत के पास भेजने पर सहमति व्यक्त की, जो यह तय करेंगे कि बड़ी पीठ का गठन किया जाए अथवा नहीं। इस मामले की जड़ में 2023 का वह कानून है, जिसमें सीईसी और ईसी की नियुक्ति के लिए चयन समिति में सीजेआई को शामिल नहीं किया गया है। इसके स्थान पर इसमें प्रधानमंत्री, उनके द्वारा नामित एक केंद्रीय मंत्री और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को शामिल किया गया है। याचिकाकर्ताओं ने इस कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए कहा है कि इससे चुनाव आयोग की स्वतंत्रता प्रभावित होती है।
इस मामले का सीधा संबंध संविधान के अनुच्छेद 324 और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता से है, जो लोकतंत्र की नींव हैं। बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं में राजनीति विज्ञान और संविधान से संबंधित प्रश्नों का महत्वपूर्ण स्थान है। इस मामले के माध्यम से परीक्षार्थी यह समझ सकते हैं कि न्यायपालिका किस प्रकार कार्यपालिका की मनमानी पर अंकुश लगाने का प्रयास कर रही है। साथ ही, यह भी स्पष्ट होता है कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना कितना आवश्यक है, क्योंकि इसका सीधा असर लोकतंत्र की मजबूती पर पड़ता है। इस प्रकार, यह मामला न केवल संवैधानिक महत्व रखता है, बल्कि परीक्षार्थियों के लिए भी अध्ययन का एक महत्वपूर्ण विषय है।
स्रोत: bhaskar.com
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