✎ हिमाचल में 7,621 मेगावाट की 527 जलविद्युत परियोजनाओं के निर्माण में देरी के कारण राज्य की ऊर्जा योजना प्रभावित हो रही है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
हिमाचल प्रदेश में सरकार द्वारा विधानसभा में दी गई लिखित जानकारी के अनुसार प्रदेश में कुल 773 स्वीकृत जलविद्युत परियोजनाओं में से 527 परियोजनाएं, जिनकी कुल क्षमता 7,621 मेगावाट है, निर्माण चरण में प्रवेश नहीं कर पाई हैं। विधायक हंसराज के प्रश्न के लिखित उत्तर में मुख्यमंत्री ने बताया कि इन परियोजनाओं के निर्माण कार्य में देरी का मुख्य कारण टेंडर प्रक्रिया का लंबित रहना है, जिसे अब नवंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, भूमि अधिग्रहण और मुआवजे की प्रक्रिया को भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन अधिकार अधिनियम-2013 तथा राज्य की नीति के अनुसार पारदर्शी तरीके से पूरा किया जा रहा है। स्थानीय लोगों को रोजगार देने का भी प्रावधान किया गया है, जैसा कि चांजू-द्वितीय परियोजना में देखा गया, जहां 45 लोगों को स्थायी रोजगार मिला।
यह मामला न केवल हिमाचल प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र की चुनौतियों को उजागर करता है, बल्कि बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। बैंकिंग क्षेत्र में, जलविद्युत परियोजनाओं के विलंबित निर्माण से ऋण वितरण और राजस्व सृजन प्रभावित हो सकता है, जिससे बैंकों की तरलता और जोखिम प्रबंधन रणनीतियों पर असर पड़ सकता है। एसएससी परीक्षाओं में, इस तरह के मामलों से संबंधित प्रश्न पर्यावरणीय कानूनों, भूमि अधिग्रहण नीति और ऊर्जा क्षेत्र के नियमन जैसे विषयों पर आधारित हो सकते हैं। आरबीआई ग्रेड बी परीक्षा में, इस विषय से अर्थव्यवस्था पर ऊर्जा परियोजनाओं के प्रभाव, सरकारी नीतियों और उनके आर्थिक निहितार्थों जैसे प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
स्रोत: amarujala.com
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