प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
**पीएम-स्वनिधि योजना का कार्यान्वयन**
पीएम-स्वनिधि योजना, जिसे शुरुआत में शहरी इलाकों में लागू किया गया था, अब पुनर्गठित रूप में जनगणना वाले कस्बों और शहरी-बाहरी इलाकों तक चरणबद्ध तरीके से विस्तारित की जा रही है। इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी), हैदराबाद द्वारा 2023 और 2025 में किए गए अध्ययनों से पता चला है कि 95 प्रतिशत लाभार्थियों के लिए पीएम स्वनिधि बैंक से लिया गया ऋण उनका पहला ऋण था, जिसका उपयोग उन्होंने अपना व्यापार बढ़ाने के लिए किया। इन अध्ययनों में यह भी पाया गया कि 2023 और 2025 के बीच पीएम स्वनिधि से ऋण लेने वालों की औसत सालाना व्यापार लाभ में लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह योजना उन रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के लिए क्रेडिट इतिहास विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, जिनकी पहले औपचारिक ऋण व्यवस्था तक बहुत कम या बिल्कुल भी पहुंच नहीं थी। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2023 से 2025 के बीच रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के बीच डिजिटल भुगतान को अपनाने में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। यह योजना केवल व्यापार को फिर से खड़ा करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसने विक्रेता परिवारों को बेहतर जीवन-स्तर, बेहतर खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा तक आसान पहुंच और बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में मदद करने में भी सक्षम बनाया है।
बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए यह जानकारी अत्यंत प्रासंगिक है। यह योजना वित्तीय समावेशन (financial inclusion) और सूक्ष्म वित्त (microfinance) के सरकारी प्रयासों को दर्शाती है, जो बैंकिंग क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण विषय हैं। योजना के तहत यूपीआई-लिंक्ड रुपे क्रेडिट कार्ड का शुभारंभ डिजिटल इंडिया पहल और कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में बैंकों की भूमिका को उजागर करता है। साथ ही, रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के क्रेडिट इतिहास के विकास में योजना की भूमिका बैंकों के लिए नए ग्राहक आधार और ऋण पोर्टफोलियो विस्तार के अवसरों को दर्शाती है। यह गवर्नेंस के तहत सामाजिक-आर्थिक विकास और कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने में सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी प्रस्तुत करती है, जो इन परीक्षाओं के सामान्य जागरूकता और नीतिगत पहलुओं के लिए महत्वपूर्ण है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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