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सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया 2021 का पर्यावरणीय मंजूरी आदेश, केंद्र की 'माफीनामा' योजना बरकरार — SC ruling on ex post facto environmental clearance

प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance

सुप्रीम कोर्ट ने 29 जुलाई, 2026 को दिए गए अपने फैसले में 2021 के कार्यालय आदेश (ओएम) को निरस्त कर दिया, जिसमें पूर्वव्यापी पर्यावरणीय मंजूरी प्रदान करने की अनुमति दी गई थी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत निर्धारित प्रक्रिया को केवल प्रशासनिक आदेश के माध्यम से बदल नहीं सकती। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि 2021 का ओएम एक स्थायी व्यवस्था स्थापित करता था, जो पूर्व अनुमति के बिना शुरू किए गए परियोजनाओं को मंजूरी देने की अनुमति देता था, जो कि 2006 के अधिसूचना के विपरीत था। न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने अपने निर्णय में कहा कि 2006 की अधिसूचना के तहत पूर्व अनुमति अनिवार्य थी और इसे केवल विशेष परियोजनाओं के लिए उपयुक्त अधिसूचना के माध्यम से बदला जा सकता था। हालांकि, न्यायालय ने केंद्र सरकार की ‘माफी योजनाओं’ (अम्नेस्टी स्कीम) की शक्ति को बरकरार रखा, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि केंद्र सरकार विशेष परिस्थितियों में पूर्वव्यापी मंजूरी प्रदान कर सकती है, बशर्ते वह उचित प्रक्रिया का पालन करे।

यह फैसला बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पर्यावरण कानूनों, प्रशासनिक आदेशों की सीमाओं और न्यायिक सक्रियता के सिद्धांतों से संबंधित अवधारणाओं को स्पष्ट करता है। बैंकिंग क्षेत्र में, पर्यावरणीय जोखिमों और नियामक अनुपालन के मुद्दे प्रमुख होते हैं, जबकि एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं में प्रशासनिक कानून, संवैधानिक प्रावधानों और पर्यावरण नीति जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, यह फैसला ‘पूर्वव्यापी प्रभाव’ और ‘न्यायिक पुनर्विलोकन’ जैसे अवधारणाओं को भी उजागर करता है, जो कि प्रशासनिक कानून और संवैधानिक कानून के पाठ्यक्रम में शामिल हैं।

स्रोत: The Hindu


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