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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जाक्सा) के वैज्ञानिकों ने बुधवार को चंद्रयान-5 मिशन की तैयारियों की समीक्षा की, जो 2028 में प्रक्षेपित किया जाना है। बेंगलुरु स्थित यूआर राव सैटेलाइट सेंटर में हुई इस बैठक में दोनों देशों के वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष यान संचार प्रणाली सहित तकनीकी समन्वय पर चर्चा की। चंद्रयान-5, जिसे लूनर पोलर एक्सप्लोरेशन मिशन (लूपेक्स) भी कहा जाता है, भारत-जापान का संयुक्त चंद्र रोवर मिशन है, जिसमें इसरो लैंडर मॉड्यूल का निर्माण कर रहा है जबकि जाक्सा रोवर विकसित कर रहा है। यह मिशन चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पानी और बर्फ की उपस्थिति का अध्ययन करेगा। जापान के एच3 रॉकेट से प्रक्षेपित होने वाले इस मिशन में सात वैज्ञानिक उपकरण होंगे, जिनमें अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) भी अपने पेलोड लगा रहे हैं। यह मिशन 100 दिनों तक चंद्रमा पर सक्रिय रहेगा।
चंद्रयान-5 मिशन भारत-जापान के बीच बढ़ते अंतरिक्ष सहयोग का प्रतीक है, जो तकनीकी नवाचार और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देगा। बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह मिशन राष्ट्रीय विकास में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की भूमिका, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सरकारी नीतियों जैसे विषयों के लिए प्रासंगिक है। इसके अतिरिक्त, इसरो की उपलब्धियां और भविष्य के मिशन जैसे गगनयान-1 जैसी मानव अंतरिक्ष उड़ानें भी करियर परीक्षाओं में पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण तथ्यों में शामिल हैं।
स्रोत: The Indian Express
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