✎ बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए कानूनी ढांचे को मज़बूत करना और वैश्विक घटनाक्रमों के अनुसार नियमों में सुधार ज़रूरी है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
डिजिटल युग में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा एक वैश्विक चिंता का विषय बन गई है, जिसके मद्देनज़र भारत सरकार सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 और डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 जैसे कानूनी ढांचों के माध्यम से सख्त कदम उठा रही है। ये कानून डिजिटल कल्याण, उपयोगकर्ता सुरक्षा और बच्चों की ऑनलाइन गोपनीयता की रक्षा के लिए एक व्यापक ढांचा प्रदान करते हैं। सरकार न केवल घरेलू नीति में बदलाव कर रही है, बल्कि वैश्विक घटनाक्रमों और अंतरराष्ट्रीय नियामक दृष्टिकोणों पर भी नज़र रख रही है, ताकि बच्चों को ऑनलाइन हानिकारक सामग्री, साइबर बुलिंग, ऑनलाइन शोषण और डिजिटल लत जैसी चुनौतियों से बचाया जा सके। इसके अतिरिक्त, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही ‘सूचना सुरक्षा शिक्षा एवं जागरूकता’ (आईएसईए) परियोजना के माध्यम से देश भर में 6,650 से अधिक जागरूकता कार्यशालाओं का आयोजन किया गया है, जिसमें 11.37 लाख से ज़्यादा लोगों ने भाग लिया है। इसके अलावा, सीबीएसई और एनसीईआरटी द्वारा स्कूलों में साइबर सुरक्षा को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है, जिससे विद्यार्थियों और शिक्षकों में डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।
बैंक पीओ, आईबीपीएस, एसबीआई, आरबीआई ग्रेड बी और एसएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें नीति निर्माण, कानूनी ढांचे और डिजिटल सुरक्षा के मुद्दे शामिल हैं, जो सीधे तौर पर शासन, कानून और तकनीकी विनियमन से संबंधित हैं। परीक्षाओं में इस विषय से संबंधित प्रश्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रावधानों, सरकारी पहलों, डिजिटल अधिकारिता और साइबर सुरक्षा के व्यापक पहलुओं पर केंद्रित हो सकते हैं। इसके अलावा, सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का उद्देश्य डिजिटल अर्थव्यवस्था
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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