✎ हाथ से मैला उठाने की प्रथा पूर्णतः खत्म करने के लिए सरकार द्वारा किए गए प्रयासों में सफलता मिल रही है, जिसमें पुनर्वास, कौशल विकास एवं कानूनी कार्रवाई शामिल हैं।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
2024-25 में किए गए एक व्यापक देशव्यापी सर्वेक्षण में सरकार ने यह पाया कि हाथ से मैला उठाने वाला कोई व्यक्ति अब देश के किसी भी जिले में मौजूद नहीं है। यह उपलब्धि ‘हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013’ के प्रभावी कार्यान्वयन का परिणाम है। इससे पहले हुए सर्वेक्षणों में 58,098 व्यक्तियों की पहचान की गई थी, जिन्हें सरकार द्वारा 40,000 रुपये की एकमुश्त वित्तीय सहायता प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त, 2023-24 से 2025-26 के दौरान 5,632 लाभार्थियों को कौशल विकास प्रशिक्षण दिया गया तथा 483 व्यक्तियों को स्वरोजगार स्थापित करने हेतु पूंजीगत सब्सिडी प्रदान की गई। यह प्रयास ‘राष्ट्रीय मशीनीकृत स्वच्छता इकोसिस्टम कार्य-योजना (नमस्ते)’ के तहत किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य मैला ढोने की प्रथा का पूर्ण उन्मूलन तथा सफाई कर्मियों के पुनर्वास को सुनिश्चित करना है।
इस विषय का महत्व बैंकिंग, एसएससी तथा आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यधिक है, क्योंकि इसमें शासन व्यवस्था, सामाजिक न्याय तथा आर्थिक पुनर्वास से संबंधित मुद्दे शामिल हैं। बैंकिंग क्षेत्र में यह सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तथा वित्तीय समावेशन के दृष्टिकोण से प्रासंगिक है, जबकि एसएससी परीक्षाओं में इसे सामाजिक कल्याण योजनाओं तथा अधिनियमों के संदर्भ में पूछा जा सकता है। आरबीआई ग्रेड बी के लिए यह विषय नीति निर्माण, सामाजिक विकास तथा आर्थिक सुधारों के अंतर्गत आता है, जो देश की समग्र विकास रणनीति का हिस्सा है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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