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बायोई3 नीति का योगदान — concept mind map

✎ बायोई3 नीति जैव-विनिर्माण को बढ़ावा देकर रोजगार, नवाचार और जैव-अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक है।

BioE3 नीति घटकजैव-आधारित रसायनऔद्योगिक उपयोगडीबीटीबायोप्लास्टिक्सपर्यावरण अनुकूलडीबीटीसक्रिय फार्मास्युटिकलऔषधि निर्माणडीबीटीकार्यात्मक खाद्यपोषण सुधारडीबीटीस्मार्ट प्रोटीनभविष्य खाद्यडीबीटीजलवायु प्रतिरोधी कृषिकृषि-जैविकडीबीटी
BioE3 नीति घटक

प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance

बायोई3 नीति जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) द्वारा तैयार की गई एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार को सुदृढ़ करना है। इस नीति के अंतर्गत जैव-आधारित रसायन, बायोप्लास्टिक्स, सक्रिय फार्मास्युटिकल तत्व, कार्यात्मक खाद्य पदार्थ, स्मार्ट प्रोटीन, सटीक जैव चिकित्सा, जलवायु प्रतिरोधी कृषि, जैव ईंधन, कार्बन कैप्चर तथा समुद्री और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे छह प्रमुख विषयगत क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। इसके साथ ही पांच प्राथमिकता वाले क्षेत्रों—आयुर्वेद कृषि नवाचार, जीनोम निदान, संश्लेषित जीव विज्ञान, बायोमोलेक्यूलर डिजाइन और बायोमैन्युफैक्चरिंग हब—की पहचान की गई है। बायोफाउंड्री और जैव-विनिर्माण केंद्रों की स्थापना के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्ताव आमंत्रित किए जाते हैं, जिनका चयन कठोर बहुस्तरीय मूल्यांकन के आधार पर किया जाता है। इस नीति से अगले पांच वर्षों में द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शहरों में लगभग 1500 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है, जबकि परियोजना लागत का 70 प्रतिशत तक सरकारी सहायता प्रदान की जाती है। इसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक 300 अरब डॉलर की जैव-अर्थव्यवस्था विकसित करना है, जिससे स्वदेशी नवाचार और उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।

बायोई3 नीति का बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष महत्व है। बैंकिंग क्षेत्र में, इस नीति के माध्यम से जैव-विनिर्माण और स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिलने से ऋण वितरण, निवेश और आर्थिक विकास में वृद्धि होगी, जो वाणिज्यिक बैंकों और एनबीएफसी के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी। एसएससी जैसी परीक्षाओं में, इस नीति के तहत रोजग

स्रोत: PIB (Press Information Bureau)


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