✎ नमामि गंगे अभियान के अंतर्गत गंगा नदी की सफाई, जैव-विविधता संरक्षण तथा प्रदूषण नियंत्रण हेतु केंद्रित प्रयास किए जा रहे हैं।
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**नमामि गंगे अभियान** के अंतर्गत केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त और स्वच्छ बनाना है। वर्ष 2025 तक नमामि गंगे अभियान-II के तहत 70 सीवरेज परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया गया, जिसमें 25 नए सीवरेज उपचार संयंत्र शामिल हैं। इससे गंगा की मुख्य धारा सहित इसकी सहायक नदियों में कुल 4,263 एमएलडी सीवेज उपचार क्षमता का सृजन हुआ है। प्रदूषित नदी खंडों (पीआरएस) में उत्तराखंड के हरिद्वार से लेकर पश्चिम बंगाल के डायमंड हार्बर तक सुधार देखा गया है, जबकि उत्तर प्रदेश और बिहार में आंशिक प्रदूषण नियंत्रण हुआ है। जैव निगरानी के अनुसार, गंगा और यमुना के किनारे अधिकांश स्थलों पर जैविक जल गुणवत्ता ‘अच्छी’ से ‘मध्यम’ श्रेणी में रही है, जिससे जलीय जीवन की संरक्षा में मदद मिली है।
इस अभियान के अंतर्गत जैव-विविधता संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है, जिसमें 3,037 घड़ियालों की उपस्थिति के आधार पर राष्ट्रीय घड़ियाल संरक्षण कार्य योजना तैयार की गई है। भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा स्थापित राष्ट्रीय नदी अनुसंधान केंद्र और चार जलीय जीव बचाव केंद्रों के माध्यम से 6,800 से अधिक जलीय जीवों को बचाया गया है। इसके अतिरिक्त, 2.05 करोड़ मछली के बीज छोड़े गए हैं, जबकि 1,500 से अधिक ताजे पानी के कछुओं का प्रजनन किया गया है। आर्द्रभूमि संरक्षण के तहत उत्तर प्रदेश में 20 नई आर्द्रभूमियों को अधिसूचित किया गया है। गंगा डॉल्फिन की आबादी 6,327 होने का अनुमान लगाया गया है, जो इस अभियान की सफलता को दर्शाता है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) द्वारा ₹35,970 करोड़ की लागत से 219 सीवरेज परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिससे 6,610 एमएलडी सीवेज उपचार क्षमता
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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