✎ नमामि गंगे अभियान के तहत सीवरेज परियोजनाएं, जैव-विविधता संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के माध्यम से गंगा की स्थिति में सुधार हुआ है।
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नमामि गंगे अभियान भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों के प्रदूषण को नियंत्रित कर उन्हें निर्मल एवं अविरल बनाना है। वर्ष 2025 तक इस अभियान के अंतर्गत 70 सीवरेज अवसंरचना परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया गया, जिनमें 25 सीवरेज उपचार संयंत्र शामिल हैं, जिससे कुल 4,263 एमएलडी सीवेज उपचार क्षमता का सृजन हुआ। प्रदूषित नदी खंडों (पीआरएस) के मामले में वर्ष 2018 की तुलना में वर्ष 2025 में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में आंशिक सुधार देखा गया है। जैव निगरानी के अनुसार, गंगा और यमुना नदियों की जैविक जल गुणवत्ता अधिकतर ‘अच्छी’ से ‘मध्यम’ श्रेणी में रही, जिससे जलीय जीवन की पारिस्थितिक क्षमता बनी रही। इस अभियान के माध्यम से वैज्ञानिक अनुसंधान, जैव-विविधता संरक्षण, आर्द्रभूमि बहाली और वृक्षारोपण जैसे प्रयासों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे न केवल नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित किया जा रहा है, बल्कि स्थानीय समुदायों को भी रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।
नमामि गंगे अभियान के अंतर्गत जैव-विविधता संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसमें घड़ियाल, डॉल्फिन, कछुओं और मछलियों जैसे जलीय जीवों के संरक्षण एवं पुनर्वास के लिए वैज्ञानिक कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। अब तक लगभग 6,800 जलीय जीवों को बचाया और पुनर्वासित किया गया है, जबकि 1,500 से अधिक नवजात कछुओं का जन्म हुआ है। इसके अतिरिक्त, गंगा बेसिन में 33,024 हेक्टेयर भूमि पर पेड़ लगाए गए हैं और 5,500 से अधिक गंगा प्रहरियों को प्रशिक्षित किया गया है। इस अभियान के माध्यम से आर्द्रभूमियों के संरक्षण और पुनरुद्धार पर भी ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जिससे प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ जलव
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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