✎ यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लगाने से बैंकों को राजस्व मिलेगा, परंतु उपभोक्ताओं पर भार बढ़ सकता है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
लोकसभा ने 6 अगस्त 2026 को भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन करते हुए एक महत्वपूर्ण कर संशोधन विधेयक पारित किया है, जिसमें यूपीआई लेनदेन और अपतटीय फंड संबंधी नियमों में बदलाव किए गए हैं। इस संशोधन के माध्यम से सरकार ने व्यापारियों द्वारा यूपीआई लेनदेन पर लगाए जाने वाले व्यापारी छूट दर (एमडीआर) को हटाने का प्रावधान किया है, जिससे भविष्य में बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को यूपीआई लेनदेन पर शुल्क लगाने का अधिकार मिल सकेगा। वर्तमान में यूपीआई लेनदेन शुल्क मुक्त हैं, लेकिन इस संशोधन से सरकार को बाद में नीति के माध्यम से शुल्क लगाने का अधिकार मिल जाएगा, जिससे डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता सुनिश्चित की जा सकेगी। साथ ही, इस विधेयक के माध्यम से सरकार ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) को सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से प्राप्त ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर आयकर से छूट प्रदान की है, जिससे भारत में वैश्विक पूंजी आकर्षित करने की दिशा में कदम उठाया गया है।
यह संशोधन बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें डिजिटल भुगतान प्रणाली, कराधान और विदेशी निवेश से संबंधित प्रमुख मुद्दे शामिल हैं। बैंक पीओ और एसबीआई परीक्षाओं में डिजिटल भुगतान प्रणाली और कर सुधारों पर आधारित प्रश्न पूछे जा सकते हैं, जबकि आरबीआई ग्रेड बी परीक्षा में मौद्रिक नीति और विदेशी निवेश के प्रभावों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। एसएससी परीक्षाओं में भी इस प्रकार के कर और आर्थिक सुधारों से संबंधित प्रश्न सामान्य ज्ञान अनुभाग में पूछे जा सकते हैं, जिससे उम्मीदवारों को वर्तमान घटनाओं की गहरी समझ रखने की आवश्यकता होती है।
स्रोत: Mint
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