
✎ थोक दवाओं के लिए पीएलआई योजना आयात निर्भरता घटाकर घरेलू उत्पादन बढ़ाने हेतु महत्वपूर्ण है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
थोक दवाओं के लिए उत्पादन-लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना भारत सरकार की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य देश में महत्वपूर्ण प्रारंभिक सामग्रियों (केएसएम), औषधि मध्यवर्तियों (डीआई) और सक्रिय फार्मास्युटिकल अवयवों (एपीआई) के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत अब तक 48 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें 6,940 करोड़ रुपये का परिव्यय स्वीकृत किया गया है। मार्च 2026 तक, इन परियोजनाओं के माध्यम से 5,070.45 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है, जबकि 87.70 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि वितरित की गई है। इससे 28 एपीआई/केएसएम/डीआई के लिए उत्पादन क्षमता का सृजन हुआ है, जिसमें पेनिसिलिन जी, क्लैवुलैनिक एसिड, डेक्सामेथासोन, एटोरवास्टेटिन जैसे प्रमुख उत्पाद शामिल हैं, जिससे आयात पर निर्भरता कम हो रही है। राज्यवार आंकड़ों के अनुसार, आंध्र प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों में सबसे अधिक परियोजनाएं स्वीकृत हुई हैं, जिनमें क्रमशः 1,745.7 करोड़ रुपये, 330.9 करोड़ रुपये, 308.4 करोड़ रुपये और 31.5 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है।
यह योजना न केवल फार्मास्युटिकल उद्योग को मजबूती प्रदान करती है, बल्कि बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी अत्यंत प्रासंगिक है। बैंकिंग क्षेत्र में, इस योजना के माध्यम से हुए निवेश और उत्पादन वृद्धि से औद्योगिक विकास और ऋण प्रवाह में वृद्धि की संभावना उत्पन्न होती है, जो बैंकिंग परीक्षाओं में अर्थव्यवस्था और उद्योग से संबंधित प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है। एसएससी परीक्षाओं में, इस योजना के तहत हुए राज्यवार निवेश और उत्पादन क्षमता जैसे आंकड़ों से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं, जबकि आरबीआई ग्रेड बी परी
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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