Mekedatu DamLegislative AssemblyAmended resolutionAdvocate GeneralMadras High Court✎ तमिलनाडु विधानसभा ने मेकेडाटू बाँध पर केंद्र सरकार से विशेष न्यायाधिकरण गठित करने की मांग की है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
मेकेडाटू बाँध पर संशोधित प्रस्ताव को विधानसभा में मतदान के बाद सर्वसम्मति से पारित किया गया, जिसकी जानकारी एडवोकेट जनरल ने मद्रास उच्च न्यायालय को दी। यह प्रस्ताव केंद्र सरकार से अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 की धारा 4 के तहत एक विशेष न्यायाधिकरण गठित करने की मांग करता है। तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा प्रस्तुत इस प्रस्ताव में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने संशोधन जोड़कर केंद्र से कर्नाटक द्वारा निर्मित किए जा रहे मेकेडाटू बाँध विवाद के निपटारे के लिए भी विशेष न्यायाधिकरण की मांग की गई। विधानसभा सचिव की ओर से पेश एडवोकेट जनरल विजय नारायण ने बताया कि प्रस्ताव पर 19 जून, 2026 को मतदान हुआ और बिना किसी आपत्ति के सर्वसम्मति से पारित किया गया। हालांकि, एआईएडीएमके के वकील द्वारा दायर याचिका में इस संशोधन को लेकर आपत्ति जताई गई है, जिसमें दावा किया गया कि संशोधित प्रस्ताव पर विधानसभा में कोई चर्चा नहीं हुई थी। उच्च न्यायालय ने इस मामले में 14 अगस्त तक जवाब दाखिल करने के लिए राज्य सरकार, मुख्य सचिव और जल शक्ति मंत्रालय को नोटिस जारी किया है।
इस मामले का राजनीतिक और संवैधानिक महत्व banking, SSC एवं RBI ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। सर्वप्रथम, अंतरराज्यीय जल विवादों के निपटारे के लिए विशेष न्यायाधिकरण का गठन संविधान के अनुच्छेद 262 एवं अंतरराज्यीय नदी जल विवाद अधिनियम, 1956 के तहत किया जाता है, जो संघवाद और सहकारी संघवाद के सिद्धांतों पर आधारित है। ऐसे विवादों का निपटारा न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाना प्रशासनिक दक्षता और कानूनी स्पष्टता को दर्शाता है, जो banking एवं प्रशासनिक सेवा परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है। दूसरा, विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव राज्य विधायिका की कार्यप्रणाली और संवैधानिक प्रक्रिया को दर्शाता है, जो भारतीय राजनीति एवं शासन व्यवस्था के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है। इसके
स्रोत: The Hindu
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