
✎ अमेरिकी रूस प्रतिबंध बिल से वैश्विक तेल बाजार में उतार-चढ़ाव और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर संकट उत्पन्न हो सकता है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
अमेरिकी सीनेट द्वारा रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक पारित होने से वैश्विक तेल बाजार में कसाव आ सकता है और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा मंडरा सकता है, ऐसा क्प्लेर विश्लेषक सुमित रितोलिया ने बताया है। यह विधेयक अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने का अधिकार देता है जो रूसी तेल एवं गैस के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल हैं। हालांकि यह विधेयक अभी अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से पारित होना बाकी है और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरना है, फिर भी इसके लागू होने पर वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रूस से तेल आपूर्ति में कमी आती है तो वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे भारत के लिए कच्चे तेल के आयात की लागत बढ़ सकती है।
भारत की रूस पर निर्भरता में तेजी से वृद्धि हुई है, खासकर 2022 में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से। वर्ष 2021 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी मात्र 2.5 प्रतिशत थी, जो 2023 में बढ़कर 39 प्रतिशत हो गई। जुलाई 2026 में तो भारत ने रूस से 28 लाख बैरल प्रति दिन तेल आयात किया, जो उसके कुल आयात का 55.5 प्रतिशत था। विशेषज्ञों का कहना है कि रूस से तेल आपूर्ति में किसी भी प्रकार की कमी से वैश्विक तेल बाजार में असंतुलन पैदा होगा और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को गंभीर चुनौती मिल सकती है। बैंकिंग एवं प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह मुद्दा महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल बाजार एवं भारत की ऊर्जा नीति पर प्रभाव पड़ सकता है, जो अर्थव्यवस्था एवं शासन विषयों के तहत पूछा जा सकता है।
स्रोत: Hindustan Times
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