✎ मद्रास उच्च न्यायालय में 15 नए न्यायाधीशों की नियुक्ति से न्यायिक प्रणाली में सुधार और न्याय तक पहुंच बढ़ेगी।
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**न्यायपालिका में सुधार: मद्रास उच्च न्यायालय में पंद्रह नए न्यायाधीशों ने ली शपथ**
मद्रास उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी द्वारा रविवार, 9 अगस्त 2026 को पंद्रह नए न्यायाधीशों को शपथ दिलाई गई। इससे न्यायालय की कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या बढ़कर 66 हो गई है, जबकि स्वीकृत पद 75 हैं। इनमें से आठ वकीलों को सीधे स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया, जबकि शेष सात को निश्चित अवधि के लिए अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया। इनमें से कई न्यायाधीशों का चयन न्यायिक सेवा से आने के बजाय बार काउंसिल से किया गया है, जो न्यायपालिका में विविधता और विशेषज्ञता को बढ़ावा देने का संकेत है। उदाहरण के लिए, न्यायमूर्ति राजनीश पथियिल ने दिल्ली विश्वविद्यालय से एलएलएम किया है और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के विशेष लोक अभियोजक रह चुके हैं, जबकि न्यायमूर्ति जी.के. मुतुकुमार ने बौद्धिक संपदा कानून में विशेषज्ञता हासिल की है। इस नियुक्ति से न्यायालय की कार्यक्षमता में सुधार होने की उम्मीद है, विशेषकर उन मामलों में जहां लंबित मुकदमों की संख्या अधिक है।
यह घटना भारतीय न्यायपालिका की संरचना और कार्यप्रणाली से संबंधित महत्वपूर्ण विषयों पर ध्यान आकर्षित करती है, जो बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया, उनकी विशेषज्ञता और न्यायालयों की स्वीकृत बनाम कार्यरत न्यायाधीशों की संख्या जैसे मुद्दे संविधान के अनुच्छेद 217 और 224 के तहत आते हैं, जो परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं। इसके अलावा, न्यायपालिका में महिला न्यायाधीशों की बढ़ती संख्या (मद्रास उच्च न्यायालय में 13 महिला न्यायाधीश) सामाजिक न्याय और समावेशिता के मुद्दों पर भी प्रकाश डालती है, जो आरबी
स्रोत: The Hindu
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