
✎ विधेयक खनिज दरों में समानता लाने के लिए राज्य नियंत्रण को सीमित करता है, लेकिन संघीय ढांचे का उल्लंघन नहीं करता।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
**संसद ने राज्य सरकारों के खनिज नियंत्रण को सीमित करने वाला विधेयक पारित किया**
संसद ने 13 अगस्त, 2026 को खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पारित कर दिया, जो राज्यों को खनिज अधिकारों एवं खनिज-संपन्न भूमियों पर कर लगाने की शक्तियों को सीमित करता है। इस विधेयक का उद्देश्य पूरे देश में खनिज दरों को समान रखना बताया गया है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि यह संविधान के तहत प्रदत्त वित्तीय संघवाद का उल्लंघन करता है। केंद्रीय खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने स्पष्ट किया कि यह कानून राज्यों की स्वायत्तता या राजस्व अधिकारों में हस्तक्षेप नहीं करता, बल्कि कोयला, लौह अयस्क, तांबा और मैंगनीज जैसे प्रमुख खनिजों पर केंद्र का नियंत्रण सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि 73% बिजली उत्पादन कोयला आधारित होने के कारण वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने के लिए केंद्र का नियंत्रण आवश्यक है। विपक्षी सदस्यों ने इस विधेयक को राज्यों के अधिकारों का अतिक्रमण बताया, जबकि सरकार ने इसे पारित कराने के लिए दोनों सदनों में बहुमत का उपयोग किया।
विधेयक के पारित होने से बैंकिंग, एसएससी एवं आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे भारतीय अर्थव्यवस्था में खनिज संसाधनों के विनियमन एवं राजस्व बंटवारे की समझ विकसित होती है। बैंकिंग परीक्षाओं में खनिज नीति के आर्थिक प्रभाव, राज्यों के राजस्व स्रोतों एवं केंद्र-राज्य संबंधों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं। एसएससी में संविधान के संघवाद सिद्धांत, कराधान शक्तियों एवं खनिज संसाधनों के प्रबंधन पर आधारित प्रश्नों की संभावना है। आरबीआई ग्रेड बी में खनिज नीति के माध्यम से राज्यों के राजस्व पर पड़ने वाले प्रभाव और इसके आर्थिक निहितार्थों पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है। इस विधेयक के माध्यम से उम्मीदवार संघवाद, राजस्व बंटवारा एवं संसदीय प्रक्रिया जैसे विषयों की गहन समझ प्राप्त कर सकते हैं, जो विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं
स्रोत: The Hindu
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