✎ राष्ट्रीय अनुसूचित जाति फैलोशिप योजना अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और अनुसंधान में सहायता प्रदान करती है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में चुनौतियाँ तो होती ही हैं, परंतु समय पर मिलने वाली फैलोशिप सहायता शोधार्थियों के लिए वरदान साबित होती है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति फैलोशिप योजना (एनएफएससी) के माध्यम से अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों को मिलने वाली आर्थिक एवं शैक्षणिक सहायता उनके शोधकार्य को निरंतर बनाए रखने में सहायक होती है। संगीता दास नामक अनुसूचित जाति वर्ग की 34 वर्षीय शोधार्थिनी ने बी.टेक और एम.टेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद पीएचडी करते हुए अनेक कठिनाइयों का सामना किया। उनके पिता मनोभ्रंश से पीड़ित थे, नवजात शिशु की देखभाल करनी थी तथा वित्तीय संकट भी था। ऐसे में एनएफएससी फैलोशिप से उन्हें प्रति माह 31,000 रुपये मिलने लगे, जिससे उन्होंने अपने शोधकार्य को बिना किसी रुकावट के पूरा किया। बाद में वे इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के ‘चिप्स टू स्टार्टअप’ कार्यक्रम में प्रोजेक्ट एसोसिएट II के पद पर कार्यरत हो गईं। उनकी सफलता इस बात का प्रमाण है कि सरकारी योजनाएँ समाज के पिछड़े वर्गों को सशक्त बनाने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
बैंकिंग, एसएससी एवं आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह मामला राजनीति एवं शासन व्यवस्था के अंतर्गत आने वाले सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की राष्ट्रीय अनुसूचित जाति फैलोशिप योजना (एनएफएससी) की प्रभावशीलता को दर्शाता है। इस योजना के माध्यम से अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे अपनी शैक्षणिक एवं पेशेवर यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा कर सकें। बैंकिंग क्षेत्र में कार्यरत अधिकारियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी होना आवश्यक है, क्योंकि इससे उन्हें समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए चलाई जा रही नीतियों को समझने में मदद मिलती है। इसी प्रकार, एसएससी एवं आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं में भी सरकारी योजनाओं
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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