✎ एसएआरएफएसीआई मामलों में अधिवक्ता आयुक्त शुल्क न्यायिक विवेक और अनुपातिकता के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
मद्रास उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है जिसमें कहा गया है कि एसएआरएफएएसईआई मामलों में अधिवक्ता आयुक्तों की फीस उनके द्वारा किए गए कार्य के अनुरूप होनी चाहिए। न्यायालय ने चेन्नगलपट्टू के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा सभी अधिवक्ता आयुक्तों के लिए ₹80,000 की समान फीस तय करने की प्रथा को अस्वीकार कर दिया। न्यायमूर्ति सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन ने स्पष्ट किया कि न्यायिक मजिस्ट्रेटों द्वारा तय की जाने वाली फीस वास्तविक कार्य, बकाया राशि, संपत्ति के मूल्य और स्थान, शामिल संपत्तियों की संख्या तथा यात्रा दूरी जैसे कारकों पर आधारित होनी चाहिए। न्यायालय ने कहा कि समान फीस का निर्धारण न्यायिक मूल्यांकन के बजाय मनमानी करार दिया जाएगा। इस आदेश का महत्व बैंकिंग क्षेत्र के लिए इसलिए है क्योंकि एसएआरएफएएसईआई अधिनियम बैंकों को ऋण वसूली में मदद करता है, और ऐसी फीसों का उचित निर्धारण बैंकों के वित्तीय बोझ को प्रभावित करता है। एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए यह विषय प्रशासनिक न्यायपालिका और वित्तीय कानूनों के अंतर्संबंध को समझने के लिए प्रासंगिक है।
इस आदेश का मुख्य उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और समानता सुनिश्चित करना है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि फीस का निर्धारण करते समय संपत्ति के मूल्य, दूरी तथा कार्य की जटिलता जैसे कारकों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। इससे बैंकों और ऋणी पक्षों दोनों के लिए न्यायिक प्रक्रिया अधिक न्यायसंगत बनेगी। एसएससी परीक्षा में इस विषय से संबंधित प्रश्न सामान्य ज्ञान अनुभाग में पूछे जा सकते हैं, जबकि आरबीआई ग्रेड बी में यह वित्तीय प्रणाली और कानूनी ढांचे के अंतर्संबंध को समझने में सहायक होगा। बैंक पीओ और आईबीपीएस परीक्षाओं के लिए यह विषय बैंकिंग विनियमन और कानूनी प्रक्रियाओं के ज्ञान को परखने के लिए महत्वपूर्ण है।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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