✎ हिमाचल प्रदेश में आयुष पद्धतियों पर लोगों का विश्वास बढ़ रहा है और यह देश के औसत से काफी अधिक है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
हिमाचल प्रदेश में आयुष पद्धतियों के प्रति बढ़ते भरोसे का एक बड़ा कारण राज्य की प्राकृतिक संपदा और सांस्कृतिक विरासत है। 57.2% लोगों द्वारा आयुष चिकित्सा प्रणालियों का उपयोग किए जाने का आँकड़ा राष्ट्रीय औसत 28.4% से कहीं अधिक है, जो राज्य की स्वास्थ्य नीति की सफलता को दर्शाता है। आयुष मंत्रालय द्वारा किए गए 79वें अखिल भारतीय आयुष सर्वेक्षण (2022-23) में यह बात सामने आई है कि हिमाचल प्रदेश में आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी पद्धतियों का व्यापक उपयोग हो रहा है। राज्य में आयुष अस्पतालों, पंचकर्म केंद्रों और प्रशिक्षित चिकित्सकों की बढ़ती संख्या ने लोगों का विश्वास और मजबूत किया है।
यह प्रवृत्ति बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि आयुष सेक्टर का विस्तार न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। आयुष उद्योग के विकास से जुड़े स्टार्टअप, आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्यात, और सरकारी योजनाओं जैसे ‘आयुष्मान भारत’ के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने के प्रयासों से बैंकिंग क्षेत्र में ऋण प्रवाह और वित्तीय समावेशन की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं। इसके अलावा, आयुष पद्धतियों के प्रति लोगों के बढ़ते विश्वास से स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र में नए उत्पादों की मांग बढ़ सकती है, जो वित्तीय संस्थानों के लिए नए अवसर प्रस्तुत करता है।
स्रोत: amarujala.com
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