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‘Governments formed amid lapses unconstitutional’: Akhilesh Yadav attacks EC over reported internal dissent on SIR — labelled illustration

✎ चुनाव आयोग की निष्पक्षता और लोकतंत्र की मजबूती के लिए इसकी स्वतंत्रता आवश्यक है।

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प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance

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**नोट:**

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने निर्वाचन आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे सरकारें जो उस अवधि के दौरान बनीं जब चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं रहा, “असंवैधानिक” हैं। उन्होंने लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधु और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में 14 बार विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मतदाता सूची से संबंधित निर्णयों पर आपत्ति दर्ज की थी। यादव ने पूछा कि अगर आयोग के अपने सदस्य ही उसके फैसलों पर सवाल उठा रहे हैं, तो वह किसके पक्ष में काम कर रहा है। उन्होंने इसे “लोकतंत्र के लिए खतरनाक” बताया और कहा कि ऐसी स्थिति में बनी सरकारें असंवैधानिक हैं। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय से इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेने की अपील भी की।

इस विवाद का बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे संविधान, चुनाव प्रक्रिया और संस्थागत पारदर्शिता जैसे विषयों पर प्रश्न उठते हैं। बैंकिंग परीक्षाओं में जहां शासन प्रणाली और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका पर प्रश्न पूछे जाते हैं, वहीं एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी में भी लोकतंत्र के मूल्यों और चुनावी सुधारों से संबंधित विषयों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। इस मामले से यह समझने में मदद मिलती है कि चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं की निष्पक्षता किस प्रकार लोकतंत्र की मजबूती से जुड़ी होती है, जो परीक्षाओं के लिए प्रासंगिक है।

स्रोत: Times of India


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