
✎ पीएलआई योजनाओं ने फार्मा एवं मेडटेक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, निर्यात एवं विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाया है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं ने भारत के फार्मास्युटिकल, सक्रिय औषधि अवयवों (एपीआई) और चिकित्सा उपकरण विनिर्माण क्षेत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार ने पीएलआई योजनाओं के माध्यम से विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने, आयात निर्भरता कम करने और तकनीकी उन्नयन को प्रोत्साहित किया है। इससे फार्मा और मेडटेक क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिला है। बल्क ड्रग्स, फार्मास्यूटिकल्स और चिकित्सा उपकरणों के लिए अलग-अलग पीएलआई योजनाओं के माध्यम से 48 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिसमें 5,210.74 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। इससे 3,792.49 करोड़ रुपये की बिक्री और 5,127 रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं।
पीएलआई योजनाओं के माध्यम से फार्मास्युटिकल और चिकित्सा उपकरण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिला है, जिससे मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को बल मिला है। फार्मास्यूटिकल्स पीएलआई योजना के तहत 46,744 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया गया है, जबकि चिकित्सा उपकरण पीएलआई योजना ने 57 विशिष्ट चिकित्सा उपकरणों के उत्पादन को शुरू किया है। इन पहलों ने उच्च मूल्य वाली दवाओं और उन्नत चिकित्सा उपकरणों के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिससे बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए यह विषय प्रासंगिक हो गया है।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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