✎ AI प्रशिक्षण हेतु पुस्तकों के विनाश से सांस्कृतिक विरासत को खतरा है, परंतु AI विकास में तेजी भी आ रही है।
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**पुस्तकों का विनाश: एआई प्रशिक्षण के लिए तकनीकी छलांग या सांस्कृतिक क्षति?**
कृत्रिम बुद्धिमत्ता कंपनियां मानव-लिखित सामग्री के विशाल भंडार की तलाश कर रही हैं, जिसके चलते दुर्लभ पुस्तकों को भी तोड़ा जा रहा है और उन्हें एआई प्रशिक्षण के लिए डिजिटाइज़ किया जा रहा है। पुस्तकें सदियों से ज्ञान, संस्कृति और भावनाओं का संरक्षक रही हैं, जिन्होंने युद्ध, आग, सेंसरशिप और समय के क्षरण को सहन किया है। वे पीढ़ियों से गुजरती रही हैं, लेखकों की आवाज़ों को संजोए रखती हैं। किंतु आज, जब एआई पुस्तकों को केवल डेटा के रूप में देखता है, तो यह सवाल उठता है कि क्या यह तकनीकी प्रगति का परिणाम है या मानवता की सांस्कृतिक विरासत का विनाश?
इस प्रक्रिया में पुस्तकों को केवल डेटा में बदल दिया जाता है, जहाँ उनका मूल्य केवल मशीनों को प्रशिक्षित करने तक सीमित रह जाता है। हालांकि कुछ कंपनियां दुर्लभ पुस्तकों को संरक्षित करने का दावा करती हैं, किंतु कानूनी तौर पर भी यह नैतिक प्रश्न उठता है कि क्या पुस्तकों का विनाश उचित है। बैंकिंग और प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे आईबीपीएस, एसबीआई, आरबीआई ग्रेड बी और एसएससी के दृष्टिकोण से देखें, तो एआई के बढ़ते उपयोग से डेटा सुरक्षा, बौद्धिक संपदा अधिकार और तकनीकी नैतिकता जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण हो जाते हैं। ऐसे में, पुस्तकों के विनाश से न केवल साहित्यिक धरोहर खतरे में है, बल्कि इससे भविष्य में ज्ञान के स्रोतों पर भी असर पड़ सकता है।
स्रोत: Times of India
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