प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy
**मुद्रास्फीति व्यापक हो रही है या नहीं, इस पर आरबीआई के नीति-निर्धारकों में मतभेद चिंता का विषय है।** 5-7 अक्टूबर की बैठक में आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के छह सदस्यों में से चार सदस्यों ने मुद्रास्फीति के व्यापक होने की आशंका व्यक्त की, जबकि दो सदस्यों ने इसे लेकर चिंता व्यक्त नहीं की। चार सदस्यों—बाहरी सदस्य सौरभ भट्टाचार्य, राम सिंह तथा आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा और कार्यकारी निदेशक इंद्रनील भट्टाचार्य—ने माना कि मूल्य दबाव आर्थिक व्यवस्था में स्थायी रूप से फैल रहे हैं। वहीं, बाहरी सदस्य नागेश कुमार और डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने इसे लेकर कम चिंता जताई। इस मतभेद से नीति की स्पष्टता प्रभावित होती है, जिससे ब्याज दरों में वृद्धि को लेकर अनिश्चितता बढ़ जाती है।
**इस मुद्रास्फीति के व्यापक होने से आरबीआई का 4% के मध्यम अवधि के लक्ष्य को प्राप्त करना कठिन हो सकता है।** सितंबर में सीपीआई मुद्रास्फीति 5.54% तक पहुंच गई, जो अगस्त के 4.83% से अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मुद्रास्फीति वस्तुओं और सेवाओं के व्यापक वर्गों में फैलती है, तो इसे नियंत्रित करना कठिन हो जाएगा। आरबीआई के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि इससे मौद्रिक नीति के प्रभावी कार्यान्वयन पर असर पड़ सकता है। बैंक पीओ, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए यह विषय महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें मौद्रिक नीति, मुद्रास्फीति नियंत्रण और आरबीआई की भूमिका जैसे प्रमुख आर्थिक पहलुओं को समझना आवश्यक है।
स्रोत: The Indian Express
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