✎ एनआईआरएफ रैंकिंग शिक्षा संस्थानों के मूल्यांकन का मानक है, किंतु इसकी पद्धति में सुधार आवश्यक है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) देश भर के संस्थानों को रैंक करने की पद्धति तय करता है। इसमें मुख्य रूप से पांच मानकों—”शिक्षण, अधिगम एवं संसाधन”, “शोध एवं व्यावसायिक प्रथाएं”, “स्नातक परिणाम”, “आउटरीच एवं समावेशिता” तथा “धारणा”—पर ध्यान दिया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की रैंकिंग प्रणाली शिक्षण की गुणवत्ता एवं छात्रों के समग्र विकास का सही मापन नहीं करती। इससे कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों के आंतरिक कार्य में भी असंतुलन आता है, क्योंकि कुछ गतिविधियों को अधिक महत्व मिलता है। इससे गुणवत्ता की बजाय मात्रा पर जोर पड़ता है, जो शैक्षणिक ईमानदारी को प्रभावित कर सकता है। उच्च शिक्षा संस्थानों का मूल्यांकन इस प्रकार किया जाना चाहिए जिससे समानता एवं शिक्षा की समग्र गुणवत्ता में सुधार हो सके।
बैंक पीओ, आईबीपीएस, एसबीआई, आरबीआई ग्रेड बी एवं एसएससी जैसी परीक्षाओं के लिए यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे देश की शिक्षा प्रणाली एवं शासन व्यवस्था की समझ विकसित होती है। एनआईआरएफ रैंकिंग का प्रभाव सीधे तौर पर संस्थानों की प्रतिष्ठा, सरकारी अनुदान एवं छात्रों के कैरियर पर पड़ता है। इसके अलावा, बैंकिंग क्षेत्र में भी शिक्षित जनशक्ति की गुणवत्ता एवं अनुसंधान पर आधारित नवाचार को प्रोत्साहन मिलता है। आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं में भी शासन, नीति निर्माण एवं आर्थिक विकास से जुड़े प्रश्नों में इस तरह के विषयों से मदद मिल सकती है।
स्रोत: The Hindu
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