प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy
**नोट:**
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) द्वारा बुधवार को रेपो दर में 25 आधार अंक की वृद्धि कर इसे 5.5% तक पहुंचाने की संभावना पहले से ही थी, लेकिन अप्रत्याशित था उसका रुख बदलकर “तटस्थ” से “संयमित कसाव” (कैलिब्रेटेड टाइटनिंग) करना। इसका अर्थ है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना लगभग समाप्त हो गई है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने स्पष्ट किया कि नीति दर में पुनर्समायोजन आवश्यक है, क्योंकि अगले तीन तिमाहियों में औसत मुद्रास्फीति लगभग 5.8% रहने का अनुमान है, जबकि कोर मुद्रास्फीति 2026-27 में 4.4% तक रहने का पूर्वानुमान है। इससे बाजारों को यह संकेत मिलता है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रह सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव मौद्रिक नीति के प्रति आरबीआई की आक्रामकता को दर्शाता है, जिससे आगामी नौ महीनों में 75-100 आधार अंकों की वृद्धि संभव है। हालांकि, अगस्त में भी मुद्रास्फीति के पूर्वानुमान में ज्यादा अंतर नहीं था, फिर भी अब आरबीआई ने मुद्रास्फीति के प्रसार और बढ़ती उम्मीदों को लेकर चिंता व्यक्त की है।
बैंकिंग परीक्षाओं जैसे बैंक पीओ, आईबीपीएस, एसबीआई और आरबीआई ग्रेड बी के लिए यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है। आरबीआई की नीति दर में बदलाव का सीधा असर ऋण की लागत, बैंकिंग प्रणाली की तरलता और आर्थिक वृद्धि पर पड़ता है। एसएससी उम्मीदवारों के लिए भी यह जानना आवश्यक है कि मुद्रास्फीति नियंत्रण के लिए आरबीआई द्वारा उठाए गए कदम किस प्रकार अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। इसके अलावा, आरबीआई की “कैलिब्रेटेड टाइटनिंग” जैसी शब्दावली का अर्थ समझना और इसके निहितार्थों को जानना परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के लिए सहायक होगा। इस बदलाव से बाजारों में सतर्कता बढ़ेगी, जिससे निवेशकों और ऋण लेने वालों दोनों को अपने वित्तीय निर्णयों में सावधानी बरतनी होगी।
स्रोत: The Indian Express
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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