✎ आपातकाल के दौरान डीएमके सदस्यों की गिरफ्तारी मिसा के दुरुपयोग का प्रमुख उदाहरण था।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
**आपातकाल के दौरान डीएमके सदस्यों को मनमाने आधार पर हिरासत में लिया गया था, जो मिसा के प्रावधानों की मूल भावना के विरुद्ध था: शाह आयोग**
आपातकाल (25 जून 1975 से 21 मार्च 1977) के दौरान तमिलनाडु में डीएमके सदस्यों को मनमाने और अस्पष्ट आधार पर हिरासत में लिया गया था, जो मिसा (मेनटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट) के प्रावधानों की मूल भावना के विपरीत था। शाह आयोग द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में बताया गया कि 1,027 व्यक्तियों को मिसा के तहत हिरासत में लिया गया, जिसमें 570 विपक्षी दलों से संबंधित थे, जिनमें डीएमके के 419 सदस्य शामिल थे। आयोग ने पाया कि जिला अधिकारियों ने डीएमके सदस्यों और उनके सहयोगियों के खिलाफ मनमाने तरीके से हिरासत आदेश जारी किए, जिनमें कोई ठोस गतिविधि या सबूत नहीं दिए गए। इसके अलावा, हिरासत के आधार केवल सामान्य और अस्पष्ट थे, जैसे “व्यक्ति विशेष पार्टी का सक्रिय कार्यकर्ता है” या “उसके पास बदमाश तत्व हैं,” जिनमें कोई ठोस घटना या अपराध का उल्लेख नहीं था।
यह मामला भारतीय राजनीति में आपातकाल के दौरान अधिकारों के हनन और प्रशासनिक मनमानी का एक प्रमुख उदाहरण है। बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह विषय संविधान के अनुच्छेद 352 (आपातकाल की घोषणा), अनुच्छेद 22 (गिरफ्तारी और हिरासत के अधिकार), और मिसा जैसे कानूनों के प्रावधानों के तहत नागरिक स्वतंत्रता के हनन के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, यह विषय प्रशासनिक कानून, न्यायिक पुनर्विलोकन और संवैधानिक उपचारों (अनुच्छेद 32) के महत्व को भी रेखांकित करता है, जो परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते हैं।
स्रोत: The Hindu
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