✎ कोयला कंपनियों द्वारा सीएसआर पहलों के माध्यम से दुर्लभ रोगों और जन्मजात हृदय दोष के उपचार में महत्वपूर्ण योगदान।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी द्वारा भारतीय कोयला कंपनियों के लिए पहली क्षेत्रव्यापी सीएसआर रूपरेखा का शुभारंभ किया गया है, जिसका उद्देश्य कोयला खनन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। इस रूपरेखा को भारतीय कॉरपोरेट कार्य संस्थान (आईआईसीए) द्वारा तैयार किया गया है और यह कंपनी अधिनियम, 2013 के अंतर्गत वैधानिक सीएसआर व्यवस्था का पहला क्षेत्र-विशिष्ट मॉडल है। इसके साथ ही, थैलेसीमिया बाल सेवा योजना (टीबीएसवाई) और नन्हा सा दिल जैसी प्रमुख पहलों के अंतर्गत 1,050 से अधिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट तथा 1,500 सुधारात्मक हृदय सर्जरी पूरी की गई हैं। ये पहलें न केवल दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों के इलाज में मदद कर रही हैं, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित कर रही हैं। इस प्रकार, सीएसआर रूपरेखा और स्वास्थ्य संबंधी पहलें सामाजिक न्याय और समावेशिता को बढ़ावा देने के साथ-साथ सरकार की ‘स्वस्थ भारत’ और ‘सबका साथ, सबका विकास’ जैसी नीतियों के अनुरूप हैं।
बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें सरकारी नीतियों, सीएसआर गतिविधियों, सामाजिक कल्याण योजनाओं और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) की भूमिका पर प्रकाश डाला गया है। थैलेसीमिया बाल सेवा योजना जैसी पहलों से सरकार की स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच बढ़ाने की प्रतिबद्धता का पता चलता है, जो ‘सार्वजनिक स्वास्थ्य’ और ‘सामाजिक न्याय’ जैसे विषयों के अंतर्गत पूछे जा सकते हैं। इसके अलावा, सीएसआर रूपरेखा का शुभारंभ कॉरपोरेट गवर्नेंस और सामाजिक उत्तरदायित्व के मुद्दों पर आधारित प्रश्नों के लिए प्रासंगिक है, जो आरबीआई ग्रेड बी के पेपर-2 में शामिल होते हैं। इसी प्रकार, कोल इंडिया लिमिटेड जै
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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