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झारखंड में राजनीतिक गतिविधियों ने अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय के प्रतिनिधित्व को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने लातेहार के पूर्व विधायक बैद्यनाथ राम को राज्यसभा भेजा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पलामू के पूर्व सांसद ब्रजमोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया है। दोनों नेताओं की नियुक्तियों को झारखंड की राजनीति में अनुसूचित जाति समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के नजरिये से देखा जा रहा है, खासकर पलामू प्रमंडल में, जहां एससी मतदाता चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। पलामू प्रमंडल में भाजपा का दबदबा रहा है, और झामुमो भी यहां अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है, जिसका संकेत बैद्यनाथ राम की राज्यसभा में नियुक्ति से मिल रहा है।
झारखंड में दोनों दलों द्वारा उठाए गए इन कदमों का सीधा संबंध 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़ा हुआ है। बैद्यनाथ राम की राज्यसभा में नियुक्ति को झामुमो की अनुसूचित जाति समुदाय तक पहुंच बढ़ाने और अपने अनुभवी नेताओं को सम्मान देने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जबकि ब्रजमोहन राम की राज्यपाल नियुक्ति को भाजपा द्वारा एससी समुदाय के प्रतिनिधित्व को मजबूत करने के प्रयास के रूप में पेश किया जा रहा है। इन फैसलों के राजनीतिक मायने पलामू प्रमंडल में दोनों दलों की रणनीति और उनके जनाधार पर पड़ने वाले प्रभाव के संदर्भ में निकाले जा रहे हैं, जिससे राज्य में राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और गतिशीलता बढ़ गई है।
स्रोत: amarujala.com
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