✎ समग्र शिक्षा योजना में शिक्षकों की कमी, वित्तीय संकट और उच्च ड्रॉपआउट दर प्रमुख चुनौतियाँ हैं जिन्हें तत्काल हल करने की आवश्यकता है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
हाल ही में, पश्चिम बंगाल में समग्र शिक्षा योजना के क्रियान्वयन में गंभीर कमियाँ उजागर हुई हैं, जिसके कारण राज्य में शिक्षा प्रणाली प्रभावित हो रही है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की एक प्रदर्शन लेखा परीक्षा रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य में उच्च माध्यमिक स्तर पर नामांकन दर में 28 से 42% तक की गिरावट दर्ज की गई है। इसका मुख्य कारण विद्यार्थियों का स्कूल छोड़ना है, जो मुख्य रूप से आर्थिक कठिनाइयों, बाल विवाह और कम उम्र में कमाई के उद्देश्यों से प्रेरित है। सर्वेक्षण में शामिल 581 बच्चों में से 53% के माता-पिता ने वित्तीय संकट को शिक्षा छोड़ने का प्रमुख कारण बताया। इसके अतिरिक्त, राज्य में 520 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं था, जबकि 5,152 स्कूलों में केवल एक शिक्षक कार्यरत था, जिससे 1,76,491 विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित हुई। शिक्षकों की कमी और विद्यालयों में विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात (PTR) के असंतुलन ने शिक्षा की गुणवत्ता को भी प्रभावित किया है।
वित्तीय प्रबंधन के मोर्चे पर भी राज्य की स्थिति कमजोर रही है। CAG की रिपोर्ट के अनुसार, समग्र शिक्षा योजना के अंतर्गत केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा आवंटित धनराशि का उपयोग केवल 46 से 65% ही किया गया, जबकि कई बार धनराशि के विलंबित आवंटन और योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी के कारण ₹2,428 करोड़ की राशि प्राप्त नहीं हो सकी। इसके अलावा, ₹395 करोड़ की राशि स्कूलों के बुनियादी ढांचे के विकास में खर्च नहीं की जा सकी, क्योंकि संबंधित कार्यों को पूरा नहीं किया गया। इस स्थिति से न केवल शिक्षा प्रणाली प्रभावित हुई है, बल्कि राज्य की आर्थिक विकास दर पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि शिक्षित जनशक्ति की कमी से कौशल विकास और रोजगार सृजन में बाधा उत्पन्न होगी। बैंकिंग और SSC परीक्षाओं के लिए यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन और सामाजिक विकास के मुद्दों पर प्रश्न उठते हैं, जो
स्रोत: The Hindu
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