✎ थोक दवाओं के लिए पीएलआई योजना भारत में दवा विनिर्माण क्षमता बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करती है और आपूर्ति श्रृंखला को लचीला बनाती है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
लचीली दवा आपूर्ति श्रृंखला के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई थोक दवाओं हेतु उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना भारत के फार्मास्युटिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह योजना प्रमुख प्रारंभिक सामग्रियों, दवा मध्यवर्ती और सक्रिय औषधीय सामग्रियों के घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित कर रही है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हो रही है और दवा आपूर्ति श्रृंखला में लचीलापन आ रहा है। उदाहरण के तौर पर, ऑरोबिंदो फार्मा की सहायक कंपनी लाइफियस फार्मा ने आंध्र प्रदेश में पेनिसिलिन जी के उत्पादन के लिए 2,270 करोड़ रुपये का निवेश किया है, जिससे 15,000 मीट्रिक टन वार्षिक उत्पादन क्षमता और 2,353 रोजगार सृजित हुए हैं। इसी प्रकार, डीपीबी समूह की कंपनी किनवान प्राइवेट लिमिटेड ने हिमाचल प्रदेश में क्लैवुलैनिक एसिड के उत्पादन के लिए 504 करोड़ रुपये का निवेश किया है, जो भारत की पहली किण्वन-आधारित सुविधा है। ये परियोजनाएं न केवल आयात प्रतिस्थापन में योगदान दे रही हैं, बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा को भी मजबूत कर रही हैं, जिससे बाहरी आपूर्ति व्यवधानों और मूल्य उतार-चढ़ाव के जोखिम कम हो रहे हैं।
यह योजना बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। बैंकिंग परीक्षाओं में इस तरह की सरकारी योजनाओं के माध्यम से आत्मनिर्भरता, आयात प्रतिस्थापन और रोजगार सृजन जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं, जो अर्थव्यवस्था के विकास और सरकारी नीतियों के प्रभाव को समझने के लिए आवश्यक हैं। एसएससी परीक्षाओं में भी इस योजना के माध्यम से फार्मास्युटिकल क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, तकनीकी क्षमता निर्माण और आपूर्ति श्रृंखला में सुधार जैसे विषयों पर प्रश्न बनाए जा सकते हैं। आरबीआई ग्रेड बी परीक्षा में इस योजना के
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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