✎ बिहार में शराबबंदी पर NCAER रिपोर्ट के बाद राजस्व वृद्धि और राजनीतिक बदलावों पर बहस तेज हुई है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू हुए लगभग एक दशक बाद राज्य सरकार के सामने इसके आर्थिक और सामाजिक प्रभावों पर पुनर्विचार करने का दबाव बढ़ गया है। राष्ट्रीय अनुप्रयुक्त आर्थिक अनुसंधान परिषद (NCAER) द्वारा प्रकाशित एक ताज़ा रिपोर्ट में शराबबंदी को ढीला कर नियंत्रित बिक्री और आबकारी कर व्यवस्था लागू करने की सिफारिश की गई है, जिससे राज्य के राजस्व में 14-15% तक की वृद्धि संभव बताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पूर्ण प्रतिबंध के कारण अवैध शराब की तस्करी और अन्य नशीले पदार्थों के सेवन में वृद्धि हुई है, जबकि महिलाओं की सुरक्षा जैसे सामाजिक दावों पर भी सवाल उठाए गए हैं। इस बहस ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, जहाँ एनडीए घटक दलों के भीतर भी शराबबंदी को लेकर मतभेद उभर आए हैं। जनता दल (यूनाइटेड) शराबबंदी बनाए रखने का पक्षधर है, वहीं कुछ नेताओं ने इसकी समीक्षा की मांग उठाई है, जबकि केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने इसे खत्म करने का विरोध किया है।
इस मुद्दे की गहराई को समझने के लिए परीक्षाओं की दृष्टि से इसकी प्रासंगिकता स्पष्ट है। बैंक पीओ, आईबीपीएस, एसबीआई और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में राज्य की अर्थव्यवस्था, राजस्व संग्रहण और नीति निर्माण जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे जाते हैं। NCAER जैसी संस्था की रिपोर्टें राज्यों के विकास और आर्थिक सुधारों के विश्लेषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जो सीधे तौर पर कर संग्रह, राजस्व वृद्धि और सार्वजनिक नीति से जुड़े होते हैं। इसी प्रकार, एसएससी परीक्षाओं में भी शासन व्यवस्था, नीति निर्माण और उनके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर आधारित प्रश्न आते हैं। बिहार जैसे राज्य में शराबबंदी जैसे विवादास्पद फैसले का पुनर्मूल्यांकन न केवल राज्य की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करेगा, बल्कि इससे जुड़े कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन भी परीक्षार्थियों के लिए उपयोगी साबित होगा।
स्रोत: amarujala.com
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