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Five crore Indian children still lack access to sanitation service in their schools, says UN report — concept mind map
भारत में 5 करोड़ बच्चों को स्कूलों में नहीं मिल रहा स्वच्छता सुविधा: UN रिपोर्ट — भारत में स्कूलों में स्वच्छता सुविधाओं की कमी वाले बच्चों की संख्या (2025)
आरेख: भारत में स्कूलों में स्वच्छता सुविधाओं की कमी वाले बच्चों की संख्या (2025)

✎ स्कूलों में स्वच्छता सुविधाओं की कमी से 5 करोड़ भारतीय बच्चे प्रभावित, एसडीजी 2030 के लक्ष्यों को पूरा करने में चुनौती।

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भारत में पांच करोड़ बच्चों को अभी भी अपने स्कूलों में स्वच्छता सुविधाओं तक पहुंच नहीं है, यह बात संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में सामने आई है। ‘प्रोग्रेस ऑन ड्रिंकिंग वॉटर, सैनिटेशन एंड हाइजीन इन स्कूल्स 2015-2025’ शीर्षक वाली इस रिपोर्ट के अनुसार, 2025 तक दुनिया भर में 24.4 करोड़ बच्चों को स्कूलों में स्वच्छता सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें से आधे से अधिक यानी 5 करोड़ बच्चे भारत के हैं। यह रिपोर्ट भारत के लिए एक बड़ी चुनौती को उजागर करती है, क्योंकि देश को 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के तहत निर्धारित स्वच्छता और स्वच्छ पेयजल सुविधाओं को सार्वभौमिक बनाने के लक्ष्य को पूरा करने में अभी भी काफी प्रयास करने होंगे। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्कूलों में स्वच्छता सुविधाओं में 14% की कमी लाने में सफलता हासिल की है, जो एक सकारात्मक कदम है।

इस रिपोर्ट का बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विशेष महत्व है। बैंकिंग क्षेत्र में, सरकारी योजनाओं जैसे स्वच्छ भारत मिशन के क्रियान्वयन और उसके प्रभाव का अध्ययन किया जाता है, जो आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण से सीधे जुड़ा है। एसएससी परीक्षाओं में भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के माध्यम से देश की प्रगति और चुनौतियों का विश्लेषण पूछा जाता है, जिससे उम्मीदवारों की सामाजिक-आर्थिक जागरूकता का परीक्षण होता है। आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं में, सरकारी नीतियों और उनके परिणामों का आर्थिक दृष्टिकोण से मूल्यांकन किया जाता है, जिससे देश की विकासात्मक प्राथमिकताओं को समझने में मदद मिलती है। इस रिपोर्ट के माध्यम से उम्मीदवार न केवल वर्तमान मामलों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, बल्कि सरकारी योजनाओं के प्रभाव और उनके आर्थिक निहितार्थों को भी समझ सकते हैं, जो परीक्षाओं में सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है।

स्रोत: The Hindu


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