✎ विक्रम-1 लॉन्च भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी भागीदारी की सफलता और भविष्य की संभावनाओं को दर्शाता है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Science & Technology
भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी भागीदारी की सफलता का प्रमाण विक्रम-1 के प्रक्षेपण से मिलता है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने गुरुवार को भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएसटी) के 14वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि विक्रम-1 का सफल प्रक्षेपण अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी भागीदारी के लिए इसरो द्वारा प्रदान किए जा रहे निरंतर समर्थन को दर्शाता है। उन्होंने इसरो द्वारा हाल ही में किए गए अंतरिक्ष क्षेत्र सुधारों को ‘क्रांतिकारी उपलब्धि’ बताया, जिसने निजी क्षेत्र के लिए अभूतपूर्व अवसर खोले हैं। भारत ने चंद्रयान मिशन के माध्यम से चंद्रमा पर जल संबंधी साक्ष्य खोजने तथा चंद्र दक्षिणी ध्रुव के निकट ऐतिहासिक सॉफ्ट लैंडिंग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में वैश्विक स्तर पर नेतृत्व किया है। इस सफलता से अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमताओं का पता चलता है, जो बैंकिंग, एसएससी एवं आरबीआई ग्रेड बी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे देश की तकनीकी एवं वैज्ञानिक प्रगति का प्रमाण मिलता है।
इसरो अध्यक्ष के वक्तव्य में अंतरिक्ष क्षेत्र में सार्वजनिक-निजी भागीदारी के महत्व पर प्रकाश डाला गया है, जो वर्तमान में भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों को गति प्रदान कर रहा है। आईआईएसटी के दीक्षांत समारोह में उपस्थित गवर्नर राजेंद्र विष्णु अरलेकर ने छात्रों को अंतरिक्ष को अपनी आकांक्षाओं की सीमा न मानने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि भारत की बढ़ती वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्षमताओं ने वैश्विक परिदृश्य में देश की स्थिति को सुदृढ़ किया है। यह विषय बैंक पीओ, एसएससी एवं आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि इससे देश की राष्ट्रीय सुरक्षा, तकनीकी आत्मनिर्भरता एवं वैश्विक प्रतिष्ठा से संबंधित प्रश्नों की तैयारी में मदद मिलती है।
स्रोत: The Hindu
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