✎ अनिवार्य वाहन बीमा से सड़क सुरक्षा और पीड़ित मुआवजा सुनिश्चित करें।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करे, जिसके तहत बिना बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन देने से इनकार किया जा सके। शीर्ष अदालत ने इस कदम को सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर मुआवजा सुनिश्चित करने और अनिवार्य बीमा के महत्व को रेखांकित करने के लिए उठाया है। न्यायमूर्ति संजय करोल और प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने लगभग 56% भारतीय सड़कों पर चलने वाले वाहनों के बिना बीमा होने की चिंता जताते हुए कहा कि बीमा न होने से पीड़ितों को मुआवजे के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है। अदालत ने ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (एएनपीआर) कैमरों को बीमा डेटाबेस से जोड़ने, ट्रैफिक पुलिस को हैंडहेल्ड डिवाइस उपलब्ध कराने और पेट्रोल पंपों पर ईंधन आपूर्ति को बीमा स्थिति से जोड़ने के लिए तकनीक-आधारित तंत्र लागू करने का आदेश दिया है। इसके अलावा, नए वाहनों के लिए अनिवार्य थर्ड-पार्टी बीमा की अवधि भी बढ़ाकर चार साल (निजी कारों के लिए) और छह साल (दो-पहिया वाहनों के लिए) कर दी गई है।
यह निर्णय बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है। बैंकिंग क्षेत्र में, बीमा कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के लिए यह महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे वाहन बीमा से संबंधित कानूनी ढांचे में बदलाव आएगा, जो ऋण जोखिम मूल्यांकन और ग्राहक सेवा को प्रभावित कर सकता है। एसएससी परीक्षाओं में, इस मामले के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट की भूमिका, मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधान और तकनीकी एकीकरण जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं। आरबीआई ग्रेड बी परीक्षा के लिए, यह नीति वित्तीय समावेशन और जोखिम प्रबंधन के दृष्टिकोण से प्रासंगिक है, क्योंकि बीमा कवरेज की अनिवार्यता से सड़क सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता को बल
स्रोत: Hindustan Times
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