✎ घुमंतू जनजातियों के अधिकारों के लिए विशेष नीति और योजनाओं की आवश्यकता है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
राज्य सभा सदस्य ने विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू समुदायों के अधिकारों के लिए विशेष नीति की मांग की है। राज्य सभा सदस्य पाका वेंकट सत्यनारायण ने सोमवार, 31 अगस्त, 2026 को विजयवाड़ा में बीजेपी द्वारा आयोजित विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू जनजाति दिवस कार्यक्रम में कहा कि संविधान में प्रदत्त लाभों को इन समुदायों तक पूर्ण रूप से पहुंचाने के लिए एक विशेष नीति बनाई जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि आजादी के 80 वर्ष बाद भी इन समुदायों को सामाजिक एवं आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सत्यनारायण ने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक समुदायों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है, परंतु विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू समुदायों को इन लाभों से वंचित रखा गया है। उन्होंने बताया कि ब्रिटिश शासन ने इन्हें ‘जन्मजात अपराधी’ करार देते हुए समाज के हाशिये पर धकेल दिया था, जबकि इन समुदायों ने भारतीय संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकारों से इन समुदायों के जीवनयापन को सुदृढ़ करने के लिए एक विशेष कार्य योजना बनाने की मांग की।
यह मुद्दा बैंक पीओ, आईबीपीएस, एसबीआई, आरबीआई ग्रेड बी एवं एसएससी जैसी परीक्षाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक है, क्योंकि इसमें संवैधानिक प्रावधानों, सामाजिक न्याय, अल्पसंख्यक एवं पिछड़े वर्गों के अधिकार, तथा सरकारी नीतियों के कार्यान्वयन जैसे विषय शामिल हैं। विमुक्त, घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू समुदायों की स्थिति का अध्ययन करने से परीक्षार्थियों को भारतीय समाज की विविधता, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि एवं समसामयिक मुद्दों की गहरी समझ विकसित होगी। इसके अतिरिक्त, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन एवं उनके प्रभावों पर आधारित प्रश्न भी परीक्षाओं में पूछे जा सकते हैं, जिससे उम्मीदवारों की विश्लेषणात्मक क्षमता
स्रोत: The Hindu
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