प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) के हस्तक्षेप के बाद वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने प्रमुख सरकारी वित्तीय योजनाओं जैसे पीएम मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया, पीएम रोजगार सृजन कार्यक्रम, पीएम स्वनिधि, सीजीटीएमएसई और एमएसएमई बिजनेस लोन के तहत अनुसूचित जाति लाभार्थियों की अनिवार्य रिपोर्टिंग के निर्देश जारी किए हैं। राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों (एसएलबीसी) और केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय बैंकर्स समितियों (यूटीएलबीसी) को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी समीक्षा बैठकों में इन योजनाओं के तहत अनुसूचित जाति लाभार्थियों की संख्या और प्रतिशत का योजना-वार तथा बैंक-वार विवरण प्रस्तुत करें। एनसीएससी को नियमित रूप से जानकारी साझा करने तथा 9 अक्टूबर, 2026 तक डीएफएस को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें डेटा संग्रह में आने वाली चुनौतियों का भी उल्लेख किया जाना है। डीएफएस ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्टिंग बैंकों और कार्यान्वयन एजेंसियों के मौजूदा डेटा का उपयोग करके की जाएगी, ताकि समानांतर रिपोर्टिंग की आवश्यकता न हो और परिभाषाओं में एकरूपता बनी रहे। एनसीएससी सचिव श्री विवेक कुमार देवांगन ने बताया कि एसएलबीसी की रिपोर्टों में अनुसूचित जाति लाभार्थियों के आँकड़े शामिल नहीं होने से उनके संवैधानिक दायित्व (अनुच्छेद 338(5)(सी)) के निर्वहन में बाधा उत्पन्न हो रही थी। इस निर्णय से वित्तीय समावेशन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी तथा अनुसूचित जाति समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास की प्रगति का सटीक आकलन संभव होगा।
यह विषय बैंक पीओ, आईबीपीएस, एसबीआई, आरबीआई ग्रेड बी और एसएससी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, वित्तीय समावेशन, संवैधानिक निकायों की भूमिका तथा डेटा रिपोर्टिंग प्रणाली जैसे बहुविषयक पहलुओं को शामिल किया गया है। बैंकिंग क्षेत्र में यह जानकारी वित्तीय समावेशन नीतियों, लक्षित वर्गों तक ऋण पहुंच तथा आरबीआई द्वारा निर्धारित नियामक ढांचे के संदर्भ में प्रासंगिक है। एसएससी परीक्षाओं में भी इसे शासन व्यवस्था, सामाजिक न्याय तथा आर्थिक विकास के अंतर्संबंध के दृष्टिकोण से देखा जा सकता है। इसके अतिरिक्त, आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं में इस प्रकार के निर्णयों का प्रभाव मौद्रिक नीति, वित्तीय समावेशन तथा समावेशी विकास जैसे विषयों पर पड़ सकता है, जो परीक्षा के पाठ्यक्रम का प्रमुख हिस्सा हैं।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau)
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