✎ ओबीसी क्रीमी लेयर नीति में आय परीक्षण बदलाव से भर्ती और पदोन्नति पर व्यापक असर संभव है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity & Governance
सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितंबर, 2026 को केंद्र सरकार की उस याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिए, जिसमें उसने ओबीसी क्रिमी लेयर नीति को ठीक करने के लिए दो साल का समय मांगा था। केंद्र ने मार्च 2026 के फैसले को पूर्वव्यापी लागू न करने की मांग की, क्योंकि इससे भर्ती, सेवा आवंटन, कैडर आवंटन, वरिष्ठता, प्रवेश और ओबीसी आरक्षण के प्रशासन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। सरकार का तर्क था कि यदि फैसले को पूर्वव्यापी प्रभाव दिया गया तो इससे लाखों लोगों की भर्तियां प्रभावित होंगी, खासकर रेलवे, बैंकों, डाक सेवा और अर्धसैनिक बलों में। यह मुद्दा बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ओबीसी आरक्षण नीति में बदलाव से सरकारी नौकरियों और प्रवेश परीक्षाओं में आरक्षण के आवंटन पर असर पड़ सकता है। साथ ही, प्रशासनिक व्यवस्था में भी व्यवधान उत्पन्न हो सकता है, जिससे उम्मीदवारों की तैयारी और भविष्य की संभावनाओं पर प्रभाव पड़ सकता है।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2026 के फैसले में ओबीसी क्रिमी लेयर के निर्धारण में माता-पिता की वेतन आय और कृषि आय को शामिल न करने का निर्देश दिया था। केंद्र सरकार का कहना था कि इस फैसले को पूर्वव्यापी लागू करने से प्रशासनिक अराजकता उत्पन्न हो सकती है, क्योंकि इससे पहले हुई भर्तियों और सेवा आवंटनों पर असर पड़ेगा। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन ने केंद्र पर आरोप लगाया कि वह न्यायालय के फैसले को टालने की कोशिश कर रहा है। यह मुद्दा बैंकिंग और एसएससी जैसी परीक्षाओं के उम्मीदवारों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ओबीसी आरक्षण नीति में बदलाव से उनकी योग्यता और भर्ती प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही, आरबीआई ग्रेड बी जैसी परीक्षाओं में भी इस नीति के बदलाव से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
स्रोत: The Hindu
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