✎ सीईसी, ईसी नियुक्ति कानून पर सुप्रीम कोर्ट के विभाजित फैसले से संविधान पीठ गठन की संभावना उत्पन्न हुई है।
प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्तों (ईसी) की नियुक्ति संबंधी कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर विभाजित फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता ने इस मामले को बड़ी पीठ के पास भेजने के अनुरोध को खारिज कर दिया, जबकि न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा ने इसे संवैधानिक व्याख्या का महत्वपूर्ण प्रश्न मानते हुए बड़ी पीठ के पास भेजने का समर्थन किया। दोनों न्यायाधीशों के मतभेद के कारण मामले को मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ के पास भेजा गया है, जिन्हें उचित संख्या में न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ का गठन करना है। यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वर्ष 2023 के कानून के तहत सीईसी और ईसी की नियुक्ति समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय मंत्री शामिल हैं, जबकि पूर्व में सीजेआई भी शामिल थे। न्यायमूर्ति दत्ता ने अपने फैसले में कहा कि न्यायालय द्वारा निर्धारित सिद्धांत पहले ही निर्वाचन आयोग को कार्यपालिका के नियंत्रण से मुक्त रखने की बात कर चुके हैं और अब केवल उन्हीं सिद्धांतों को लागू करना शेष है। वहीं, न्यायमूर्ति शर्मा ने इसे नया संवैधानिक मुद्दा बताते हुए कहा कि इस पर पूर्व में कोई स्पष्ट निर्णय नहीं दिया गया है।
इस मामले की प्रासंगिकता प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे बैंक पीओ, आईबीपीएस, एसबीआई, आरबीआई ग्रेड बी और एसएससी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता, न्यायपालिका की भूमिका और कार्यपालिका के हस्तक्षेप जैसे मुद्दे शामिल हैं, जो परीक्षा में प्रश्नों के रूप में पूछे जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्ष चुनावों की अवधारणा भी सामान्य ज्ञान और करेंट अफेयर्स के दृष्टिकोण से प्रासंगिक है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के विभाजित फैसले और मुख्य न्यायाधीश द्वारा बड़ी पीठ के गठन
स्रोत: orissapost.com
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