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यूपीआई पर एमडीआर लगाने से मुद्रास्फीति बढ़ने का खतरा: केरल वस्त्र संघ
UPI लेन-देन पर MDR लगाने के प्रभावUPI लेन-देन (वर्तमान)UPI लेन-देन (MDR लागू होने पर)लागतनिःशुल्कव्यापारी पर अतिरिक्त बोझमुद्रास्फीतिनियंत्रितबढ़ सकती हैउपभोक्ता प्रभावकम लागतमूल्य वृद्धिव्यापारी व्यवहारडिजिटल लेन-देननकदी की ओर वापसी
UPI लेन-देन पर MDR लगाने के प्रभाव

प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy

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**केरल टेक्सटाइल एंड गारमेंट्स एसोसिएशन (केटीजीए) ने यूपीआई पर शुल्क लगाने के खिलाफ चेतावनी दी है कि इससे मुद्रास्फीति बढ़ सकती है और व्यापारी नकदी की ओर लौट सकते हैं।** केटीजीए के राज्य अध्यक्ष पत्थाबिरमन टी.एस. ने कहा कि यूपीआई सार्वजनिक डिजिटल बुनियादी ढांचे के रूप में विकसित हो चुका है और इससे सरकारों, बैंकों, भुगतान प्लेटफार्मों तथा व्यापक अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण लाभ मिला है। उन्होंने बताया कि व्यापारियों को सिस्टम के रखरखाव का बोझ नहीं उठाना चाहिए, क्योंकि वे देश की कैशलेस अर्थव्यवस्था के अंतिम-मील चालक हैं। उन्होंने कहा कि यूपीआई लेनदेन पर 0.4% तक का व्यापारी शुल्क (एमडीआर) छोटे व्यापारियों पर भारी पड़ सकता है, जिनके शुद्ध लाभ मार्जिन केवल 1% से 5% के बीच होते हैं। इससे आपूर्ति श्रृंखला में लागत बढ़ सकती है और अंततः उपभोक्ताओं को ऊंचे दाम चुकाने पड़ सकते हैं।

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**इस मुद्दे का बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ है।** बैंकिंग परीक्षाओं में डिजिटल भुगतान प्रणालियों, एमडीआर नीति और इसके आर्थिक प्रभावों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं। एसएससी में अर्थव्यवस्था के सामान्य ज्ञान से संबंधित सवालों के साथ-साथ सरकारी नीतियों के विश्लेषणात्मक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। आरबीआई ग्रेड बी में भुगतान प्रणालियों, मुद्रास्फीति नियंत्रण और वित्तीय समावेशन जैसे विषयों पर गहन अध्ययन की आवश्यकता होती है, जहां इस मामले का संदर्भ प्रत्यक्ष रूप से उपयोगी हो सकता है।

स्रोत: The Hindu


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