प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Economy/Governance
**नोट:**
केरल सरकार द्वारा गठित पूर्व नौकरशाह सुधा पिल्लई की अध्यक्षता वाली समिति ने राज्य विधानसभा में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा है कि केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड (KIIFB) को फंड जुटाने और परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। समिति ने पाया है कि KIIFB के माध्यम से किए गए उधार अब राज्य के प्रत्यक्ष उधार के रूप में गिने जाने लगे हैं, जिससे राज्य के भविष्य के राजकोषीय मार्ग पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। रिपोर्ट में KIIFB द्वारा किए गए ऑफ-बैलेंस शीट उधार, राजस्व उत्पन्न करने वाली परियोजनाओं के कम अनुपात और मोटर वाहन कर तथा पेट्रोलियम सेस के धन को KIIFB को हस्तांतरित करने जैसी प्रथाओं की कड़ी आलोचना की गई है। समिति ने KIIFB के 10 वर्षों (2016-17 से 2025-26) के प्रदर्शन का सीएजी या लेखापाल महानियंत्रक, केरल द्वारा प्रदर्शन लेखापरीक्षा कराने की सिफारिश की है। इसके अलावा, KIIFB (संशोधन) अधिनियम, 2016 में संशोधन कर इसे बाजार से उधार लेने से रोके जाने की बात कही गई है। राज्य सरकार को KIIFB के बांडों, ऋणपत्रों और ऋणों के पुनर्भुगतान दायित्वों को अपने बजट में प्रावधान कर पूरा करना चाहिए।
इस रिपोर्ट का बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए विशेष महत्व है। बैंकिंग क्षेत्र में, KIIFB जैसे संस्थानों द्वारा ऑफ-बैलेंस शीट उधार लेने से राज्य के राजकोषीय स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे बैंकिंग प्रणाली की स्थिरता और ऋण जोखिम का आकलन किया जा सकता है। एसएससी परीक्षाओं में, राजकोषीय नीति, सरकारी उधार और राजस्व सृजन जैसे विषयों पर प्रश्न पूछे जा सकते हैं, जिनका संबंध सीधे KIIFB के मुद्दे से है। आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए, राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन (FRBM) अधिनियम, सरकारी उधार और राजकोषीय घाटे के प्रबंधन जैसे विषय प्रासंगिक हैं, जिन्हें KIIFB के मामले के माध्यम से बेहतर ढंग से समझा जा सकता है।
स्रोत: The Hindu
शैक्षिक उद्देश्य हेतु AanyaAi द्वारा जनित।


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