प्रासंगिकता — Banking, SSC & RBI Grade B exams: Polity
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि संसद सदस्यों द्वारा ही बनाए गए नियमों में बड़ी खामियों के कारण दलबदल विरोधी कानून को लागू करने में “भारी समस्याएँ” उत्पन्न हो रही हैं। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति पीएस नरसिंहन और अलोक अराधे की पीठ ने टिप्पणी की कि दलबदल विरोधी कानून (दसवीं अनुसूची) स्वयं संसद सदस्यों द्वारा बनाया गया है, किंतु इसके क्रियान्वयन में अनेक मुद्दे हैं। पीठ ने कहा कि कानून बनाने वालों द्वारा ही इसकी कमियों को दूर किया जाना चाहिए। साथ ही, इस मामले को गोवा में राजनीतिक दलबदलों से संबंधित लंबित मामले से जोड़ने का निर्देश दिया गया, जहाँ मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ इस प्रावधान की व्याख्या पर विचार कर रही है। सिब्बल ने तर्क दिया था कि दलबदल विरोधी कानून की धारा 4 के अंतर्गत विलय के प्रावधान का दुरुपयोग कर विधायक दलबदल को वैध बना रहे हैं, जिससे मतदाताओं की इच्छा के विपरीत सरकारें गिराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रावधान लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा बन गया है, जहाँ अल्पमत बहुमत में और बहुमत अल्पमत में बदल सकता है।
इस मामले की प्रासंगिकता बैंकिंग, एसएससी और आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में संविधान की दसवीं अनुसूची, दलबदल विरोधी कानून और न्यायपालिका की भूमिका से संबंधित प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। बैंक पीओ, आईबीपीएस और एसबीआई परीक्षाओं में भी राजनीतिक व्यवस्था, संवैधानिक प्रावधानों और न्यायिक सक्रियता जैसे विषयों पर आधारित प्रश्न आते हैं। आरबीआई ग्रेड बी परीक्षाओं में भी नीति निर्माण, कानूनी ढांचे और शासन प्रणाली से संबंधित मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। ऐसे में, सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से संबंधित तथ्यों और उनके निहितार्थों को समझना पर
स्रोत: Hindustan Times
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